बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI): UPSC के लिए 360° विश्लेषण

ARIvidya | अंतरराष्ट्रीय संबंध | UPSC GS पेपर II

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बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) चीन की प्रमुख अंतरराष्ट्रीय संपर्क और बुनियादी ढाँचा पहल है। राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने 2013 में इसकी घोषणा की थी। इसका उद्देश्य एशिया, यूरोप, अफ्रीका और अन्य क्षेत्रों में व्यापार, परिवहन, ऊर्जा तथा जन-संपर्क को बेहतर बनाना है। भारत के लिए BRI केवल बुनियादी ढाँचे की योजना नहीं है; यह संप्रभुता, रणनीतिक प्रभाव, वित्तीय स्थिरता और क्षेत्रीय संपर्क से जुड़े प्रश्न भी उठाती है।

1. BRI क्या है?

इस पहल के दो व्यापक घटक हैं—सिल्क रोड इकोनॉमिक बेल्ट, जो स्थल-आधारित संपर्क पर केंद्रित है, और 21वीं सदी का समुद्री सिल्क रोड, जो समुद्री संपर्क पर केंद्रित है। इसके अंतर्गत बंदरगाह, रेलवे, सड़कें, ऊर्जा पाइपलाइन, औद्योगिक पार्क, लॉजिस्टिक्स केंद्र और डिजिटल बुनियादी ढाँचा शामिल हो सकते हैं।

2. चीन के प्रमुख उद्देश्य

  • व्यापार मार्गों को बेहतर बनाना और परिवहन संबंधी बाधाएँ कम करना।
  • चीनी कंपनियों, निर्माण क्षमता और विदेशी निवेश को बढ़ावा देना।
  • ऊर्जा तथा कच्चे माल की आपूर्ति के मार्गों में विविधता लाना।
  • कूटनीतिक प्रभाव बढ़ाना और क्षेत्रीय आर्थिक नेटवर्क को आकार देना।
  • बाहरी संपर्क बढ़ाकर पश्चिमी चीन के क्षेत्रों के विकास को प्रोत्साहित करना।

3. प्रमुख गलियारे और उदाहरण

BRI से जुड़े उदाहरणों में चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC), चीन-यूरोप रेल संपर्क, ग्वादर और पीरियस जैसे बंदरगाहों से संबंधित परियोजनाएँ तथा मध्य एशिया, अफ्रीका और दक्षिण-पूर्व एशिया में बुनियादी ढाँचे के निवेश शामिल हैं। हर परियोजना का वित्तपोषण, पैमाना और रणनीतिक महत्व अलग हो सकता है; इसलिए प्रत्येक का स्वतंत्र मूल्यांकन आवश्यक है।

4. भारत को आपत्ति क्यों है?

  • संप्रभुता: CPEC जम्मू-कश्मीर के उन क्षेत्रों से गुजरता है जिन पर भारत दावा करता है और जो पाकिस्तान के नियंत्रण में हैं।
  • पारदर्शिता और ऋण: भारत ऋण, खरीद और भुगतान की स्पष्ट शर्तों तथा विश्वसनीय ऋण-सततता आकलन पर जोर देता है।
  • रणनीतिक चिंताएँ: कुछ बंदरगाहों और परिवहन संपर्कों के प्रभाव व्यापार से आगे भी जा सकते हैं; यह उनके स्वामित्व, पहुँच और उपयोग पर निर्भर करता है।
  • परामर्श: भारत का कहना है कि संपर्क परियोजनाओं में संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और भागीदार देशों की प्राथमिकताओं का सम्मान होना चाहिए।

5. ऋण-जाल पर बहस: संतुलित दृष्टिकोण

कुछ BRI परियोजनाओं में ऋण-संकट, पुनः बातचीत, देरी या अपेक्षा से कम व्यावसायिक लाभ देखने को मिले हैं। लेकिन यह कहना कि प्रत्येक परियोजना का उद्देश्य कर्जदार देश को फँसाना है, अत्यधिक व्यापक निष्कर्ष होगा। परिणाम परियोजना के चयन, घरेलू प्रशासन, अनुबंध की शर्तों, अनुमानित आय और देश की समग्र ऋण स्थिति पर निर्भर करते हैं। तथ्यात्मक वित्तीय जोखिमों और व्यापक राजनीतिक दावों में अंतर करना चाहिए।

6. अवसर और चुनौतियाँ

संभावित लाभों में बुनियादी ढाँचे में निवेश, लॉजिस्टिक्स लागत में कमी, बाजार तक पहुँच और क्षेत्रीय एकीकरण शामिल हैं। जोखिमों में अपारदर्शी अनुबंध, पर्यावरणीय और सामाजिक प्रभाव, लागत में वृद्धि, एक ही वित्तदाता पर निर्भरता, असमान लाभ और रणनीतिक दबाव शामिल हो सकते हैं। इसलिए मेजबान देश की क्षमता और सार्वजनिक जवाबदेही महत्त्वपूर्ण हैं।

7. भारत के विकल्प और दृष्टिकोण

  • अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारा (INSTC): भारत को ईरान, रूस और उत्तर के अन्य बाजारों से जोड़ने के उद्देश्य वाला बहु-माध्यमीय मार्ग।
  • चाबहार बंदरगाह: पाकिस्तान को बायपास करते हुए अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक पहुँच का संभावित मार्ग।
  • भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारा (IMEC): 2023 में घोषित यह पहल समुद्री और रेल संपर्कों के माध्यम से भारत, खाड़ी क्षेत्र और यूरोप को जोड़ने की परिकल्पना करती है। इसका क्रियान्वयन वित्त, समन्वय और क्षेत्रीय परिस्थितियों पर निर्भर है।
  • पड़ोसी-प्रथम संपर्क: परामर्श और पारदर्शी समझौतों के जरिए सीमा-पार व्यापार, बिजली, सड़क और डिजिटल संपर्क बेहतर करना।

8. आगे की राह

भारत को रणनीतिक सावधानी के साथ व्यावहारिक क्षेत्रीय सहयोग भी बढ़ाना चाहिए। परियोजनाओं का पारदर्शी मूल्यांकन, बहुपक्षीय वित्तपोषण, बेहतर सीमा-शुल्क और लॉजिस्टिक्स, स्थानीय समुदायों से परामर्श तथा आर्थिक व्यवहार्यता, पर्यावरणीय सुरक्षा और संप्रभुता के सम्मान पर आधारित मूल्यांकन आवश्यक हैं। संपर्क का उद्देश्य साझा समृद्धि होना चाहिए, न कि अस्थिर वित्तीय दायित्व।

त्वरित पुनरावृत्ति

पहलू मुख्य तथ्य
घोषणा 2013
स्थल-आधारित घटक सिल्क रोड इकोनॉमिक बेल्ट
समुद्री घटक 21वीं सदी का समुद्री सिल्क रोड
भारत की प्रमुख चिंता संप्रभुता, पारदर्शिता और रणनीतिक प्रभाव
वैकल्पिक संपर्क INSTC, चाबहार, IMEC और पड़ोसी देशों से संपर्क

प्रारंभिक परीक्षा अभ्यास

प्रश्न 1. बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव किस देश ने शुरू की?
(A) भारत (B) चीन (C) जापान (D) इंडोनेशिया
उत्तर: (B) चीन।

प्रश्न 2. भारत के लिए CPEC मुख्यतः विवादास्पद क्यों है?
(A) अरुणाचल प्रदेश से गुजरने के कारण (B) नेपाल से गुजरने के कारण (C) पाकिस्तान के नियंत्रण वाले जम्मू-कश्मीर के क्षेत्र से गुजरने के कारण (D) श्रीलंका से गुजरने के कारण
उत्तर: (C)। यह भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता से जुड़ा विषय है।

प्रश्न 3. IMEC की घोषणा 2023 में किस आयोजन के अवसर पर हुई?
(A) नई दिल्ली में G20 शिखर सम्मेलन (B) COP28 (C) जोहान्सबर्ग में BRICS शिखर सम्मेलन (D) समरकंद में SCO शिखर सम्मेलन
उत्तर: (A) नई दिल्ली में G20 शिखर सम्मेलन।

मुख्य परीक्षा अभ्यास | GS पेपर II

  1. “संपर्क पहलें आर्थिक एकीकरण के साथ-साथ भू-राजनीतिक प्रभाव के साधन भी हैं।” BRI और भारत की चिंताओं के संदर्भ में चर्चा कीजिए। (250 शब्द)
  2. BRI की तुलना INSTC और IMEC जैसी भारत-समर्थित संपर्क पहलों से कीजिए। टिकाऊ क्षेत्रीय संपर्क के लिए किन सिद्धांतों का पालन होना चाहिए? (150 शब्द)

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