25 सितंबर 2026 करेंट अफेयर्स
यूपीएससी एवं पीसीएस | तथ्य • विश्लेषण • प्रारंभिक परीक्षा • मुख्य परीक्षा
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1. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में वीटो शक्ति और सुधार
क्या हुआ?
संयुक्त राष्ट्र महासभा के वर्तमान सत्र के दौरान फ्रांस ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के कामकाज, विशेषकर सामूहिक सुरक्षा और वीटो के प्रयोग को अधिक उत्तरदायी बनाने की पहल पर जोर दिया है। फ्रांस ने मानवीय संकटों और नरसंहार जैसी परिस्थितियों में वीटो के प्रयोग को नियंत्रित करने की वकालत की है।
मुख्य तथ्य
- संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की स्थापना 1945 में संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अंतर्गत हुई।
- सुरक्षा परिषद में कुल 15 सदस्य होते हैं—5 स्थायी और 10 अस्थायी।
- स्थायी सदस्य हैं: अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, चीन और रूस।
- पाँचों स्थायी सदस्यों के पास वीटो शक्ति है।
- अस्थायी सदस्यों का कार्यकाल दो वर्ष होता है।
- भारत G4 समूह का सदस्य है। G4 में भारत के साथ ब्राजील, जर्मनी और जापान शामिल हैं।
- भारत सुरक्षा परिषद का अस्थायी सदस्य कई अवधियों में रह चुका है, जिनमें 2021–22 की अवधि भी शामिल है।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. सुरक्षा परिषद में 15 सदस्य होते हैं।
2. पाँच स्थायी सदस्यों के पास वीटो शक्ति होती है।
3. दस अस्थायी सदस्यों का कार्यकाल दो वर्ष होता है।
4. भारत G4 समूह का सदस्य है।
उपर्युक्त में से कितने कथन सही हैं?
(क) केवल एक (ख) केवल दो (ग) केवल तीन (घ) सभी चार
उत्तर: (घ) सभी चार
व्याख्या: चारों कथन सही हैं।
मुख्य परीक्षा प्रश्न — सामान्य अध्ययन-II: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार की आवश्यकता पर चर्चा कीजिए तथा भारत की स्थायी सदस्यता की दावेदारी के प्रमुख आधारों का परीक्षण कीजिए। (250 शब्द | 15 अंक)
2. मुख्य निर्वाचन आयुक्त को हटाने की संवैधानिक प्रक्रिया
क्या हुआ?
मुख्य निर्वाचन आयुक्त को पद से हटाने की संवैधानिक प्रक्रिया चर्चा में है। निर्वाचन आयोग की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के लिए संविधान मुख्य निर्वाचन आयुक्त को विशेष पद-सुरक्षा प्रदान करता है।
मुख्य तथ्य
- अनुच्छेद 324(5) निर्वाचन आयुक्तों की सेवा-शर्तों और कार्यकाल से संबंधित प्रावधान करता है।
- मुख्य निर्वाचन आयुक्त को सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के समान प्रक्रिया और उन्हीं आधारों पर हटाया जा सकता है।
- मुख्य आधार हैं—सिद्ध कदाचार या अक्षमता।
- अन्य निर्वाचन आयुक्तों को मुख्य निर्वाचन आयुक्त की सिफारिश पर हटाया जा सकता है।
- हटाने का प्रस्ताव लोकसभा या राज्यसभा, किसी भी सदन में प्रस्तुत किया जा सकता है।
- लोकसभा में प्रस्ताव के लिए 100 सदस्यों और राज्यसभा में 50 सदस्यों के हस्ताक्षर आवश्यक हैं।
- जाँच के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित की जाती है।
- दोनों सदनों में विशेष बहुमत से प्रस्ताव पारित होने के बाद राष्ट्रपति को औपचारिक अभिभाषण भेजा जाता है।
मुख्य निर्वाचन आयुक्त को पद से हटाने के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही नहीं है?
(क) मुख्य निर्वाचन आयुक्त को सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के समान प्रक्रिया से हटाया जा सकता है।
(ख) हटाने के आधार सिद्ध कदाचार या अक्षमता हैं।
(ग) हटाने का प्रस्ताव केवल लोकसभा में प्रस्तुत किया जा सकता है।
(घ) दोनों सदनों में विशेष बहुमत आवश्यक है।
उत्तर: (ग)
व्याख्या: प्रस्ताव लोकसभा या राज्यसभा, किसी भी सदन में प्रस्तुत किया जा सकता है।
मुख्य परीक्षा प्रश्न — सामान्य अध्ययन-II: निर्वाचन आयोग की स्वतंत्रता के लिए मुख्य निर्वाचन आयुक्त की पद-सुरक्षा क्यों महत्वपूर्ण है? संवैधानिक प्रावधानों के संदर्भ में चर्चा कीजिए। (150 शब्द)
3. गिरफ्तार व्यक्तियों की तस्वीरों का सार्वजनिक प्रसार और न्याय
क्या हुआ?
गिरफ्तारी के तुरंत बाद आरोपी की तस्वीरों और पुलिस द्वारा जारी जानकारी के सामाजिक माध्यमों पर प्रसार को लेकर न्यायिक विमर्श तेज हुआ है। प्रश्न यह है कि पुलिस द्वारा ऐसी सार्वजनिकता किस कानूनी आधार पर और किस सीमा तक की जानी चाहिए।
मुख्य तथ्य
- भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 84 फरार व्यक्तियों की उद्घोषणा और उसके प्रकाशन से संबंधित है।
- यह प्रावधान जाँच के शुरुआती चरण में गिरफ्तार व्यक्ति की तस्वीर सार्वजनिक करने का सामान्य आधार नहीं देता।
- दंड प्रक्रिया पहचान अधिनियम, 2022 पहचान के लिए माप और तस्वीरों सहित सूचनाओं के संग्रह, भंडारण और उपयोग से संबंधित है।
- यह कानून गिरफ्तार व्यक्ति की तस्वीर को सार्वजनिक रूप से प्रसारित करने की सामान्य अनुमति नहीं देता।
- अनुच्छेद 21 के तहत गरिमा और व्यक्तिगत स्वतंत्रता आपराधिक न्याय व्यवस्था के महत्वपूर्ण पहलू हैं।
- दोष सिद्ध होने से पहले किसी व्यक्ति को अपराधी के रूप में प्रस्तुत करना उसकी प्रतिष्ठा पर स्थायी प्रभाव डाल सकता है, विशेषकर डिजिटल माध्यम में।
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 84 के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?
(क) यह प्रत्येक गिरफ्तार व्यक्ति की तस्वीर प्रकाशित करने का सामान्य अधिकार देती है।
(ख) यह केवल दोषसिद्ध व्यक्तियों की तस्वीर प्रकाशित करने से संबंधित है।
(ग) यह फरार व्यक्तियों की उद्घोषणा और उसके प्रकाशन से संबंधित है।
(घ) यह केवल समाचार माध्यमों की गिरफ्तारी संबंधी रिपोर्टिंग को नियंत्रित करती है।
उत्तर: (ग)
व्याख्या: धारा 84 फरार व्यक्तियों की उद्घोषणा और उसके प्रकाशन से संबंधित है।
मुख्य परीक्षा प्रश्न — सामान्य अध्ययन-II: “आपराधिक न्याय व्यवस्था में पारदर्शिता और व्यक्ति की गरिमा के बीच संतुलन आवश्यक है।” गिरफ्तार व्यक्तियों की सार्वजनिक पहचान के संदर्भ में चर्चा कीजिए। (150 शब्द)
4. ग्रीनलैंड और नया सुरक्षा समझौता
क्या हुआ?
अमेरिका, डेनमार्क और ग्रीनलैंड के नेताओं के बीच 22 सितंबर को एक नए सुरक्षा समझौते की जानकारी सामने आई है। यह समझौता आर्कटिक क्षेत्र में अमेरिकी सुरक्षा उपस्थिति और ग्रीनलैंड की सामरिक स्थिति से जुड़ा है।
मुख्य तथ्य
- ग्रीनलैंड डेनमार्क से संबद्ध स्वायत्त क्षेत्र है।
- अमेरिका पहले से ग्रीनलैंड में पिटुफिक स्पेस बेस संचालित करता है।
- स्रोत के अनुसार वहाँ लगभग 150 अमेरिकी सैनिक तैनात हैं।
- समझौते के अंतर्गत दक्षिणी ग्रीनलैंड के नार्सारसुआक और पूर्वी क्षेत्र के मेस्टर्सविग में सैन्य सुविधाओं के विकास की बात कही गई है।
- 1951 के अमेरिका-डेनमार्क सुरक्षा समझौते ने ग्रीनलैंड में अमेरिकी सैन्य सुविधाओं के लिए व्यापक अधिकारों का आधार प्रदान किया।
- ग्रीनलैंड का महत्व आर्कटिक सुरक्षा, समुद्री मार्ग, संसाधनों और उत्तरी अटलांटिक की सामरिक स्थिति से जुड़ा है।
ग्रीनलैंड के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ग्रीनलैंड डेनमार्क से संबद्ध स्वायत्त क्षेत्र है।
2. पिटुफिक स्पेस बेस ग्रीनलैंड में स्थित है।
3. 1951 के अमेरिका-डेनमार्क सुरक्षा समझौते का ग्रीनलैंड में अमेरिकी सैन्य उपस्थिति से संबंध है।
सही उत्तर चुनिए:
(क) केवल 1 और 2 (ख) केवल 2 और 3 (ग) केवल 1 और 3 (घ) 1, 2 और 3
उत्तर: (घ)
व्याख्या: तीनों कथन स्रोत में दिए गए तथ्यों के अनुरूप हैं।
मुख्य परीक्षा प्रश्न — सामान्य अध्ययन-II: आर्कटिक क्षेत्र के बढ़ते सामरिक महत्व का वैश्विक भू-राजनीति तथा भारत के हितों के संदर्भ में विश्लेषण कीजिए। (150 शब्द)
5. वंदे मातरम् और राष्ट्रीय प्रतीकों पर संवैधानिक विमर्श
क्या हुआ?
वंदे मातरम् के सार्वजनिक गायन, इसके पदों और राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान से जुड़े संवैधानिक प्रश्न चर्चा में हैं। इस विषय में राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान और नागरिकों की संवैधानिक स्वतंत्रताओं के बीच संतुलन का प्रश्न महत्वपूर्ण है।
ऐतिहासिक तथ्य
- वंदे मातरम् की रचना बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय ने की थी।
- 1937 में कांग्रेस कार्यसमिति ने राष्ट्रीय सभाओं में इसके पहले दो पदों के उपयोग का निर्णय लिया था।
- 24 जनवरी 1950 को राजेंद्र प्रसाद ने वंदे मातरम् को राष्ट्रीय गान के साथ समान सम्मान दिए जाने की बात कही थी।
- भारतीय संविधान में “राष्ट्रीय गीत” के लिए अलग से स्पष्ट संवैधानिक प्रावधान नहीं है।
- 1986 के Bijoe Emmanuel मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने राष्ट्रगान के सम्मान और व्यक्तिगत अंतरात्मा की स्वतंत्रता से जुड़े प्रश्न पर निर्णय दिया था।
- इस विषय में मौलिक अधिकार, मौलिक कर्तव्य और राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान के बीच संवैधानिक संतुलन महत्वपूर्ण है।
वंदे मातरम् के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इसकी रचना बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय ने की थी।
2. 1937 में इसके पहले दो पदों को राष्ट्रीय सभाओं में गाने का निर्णय लिया गया था।
3. भारतीय संविधान में “राष्ट्रीय गीत” का स्पष्ट पृथक संवैधानिक प्रावधान है।
4. 24 जनवरी 1950 को राजेंद्र प्रसाद ने वंदे मातरम् को समान सम्मान दिए जाने की बात कही थी।
सही कथन कौन-से हैं?
(क) केवल 1 और 2 (ख) केवल 1, 2 और 4 (ग) केवल 2, 3 और 4 (घ) 1, 2, 3 और 4
उत्तर: (ख) केवल 1, 2 और 4
व्याख्या: स्रोत के अनुसार 1, 2 और 4 सही हैं। संविधान में “राष्ट्रीय गीत” के लिए अलग से स्पष्ट संवैधानिक प्रावधान नहीं है।
मुख्य परीक्षा प्रश्न — सामान्य अध्ययन-I/II: राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान और व्यक्ति की अंतरात्मा की स्वतंत्रता के बीच संवैधानिक संतुलन की चर्चा कीजिए। (150 शब्द)
ARIvidya परीक्षा निष्कर्ष
आज के पाँच विषय संविधान, निर्वाचन संस्थाओं, आपराधिक न्याय, वैश्विक भू-राजनीति और राष्ट्रीय प्रतीकों जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों को जोड़ते हैं। प्रारंभिक परीक्षा के लिए प्रत्येक खबर के तथ्य और मुख्य परीक्षा के लिए उसके संवैधानिक एवं नीतिगत आयामों को साथ पढ़ें।
ARIvidya — ज्ञान से प्रशासन तक

