
परिचय
हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि असाधारण परिस्थितियों (Exceptional Circumstances) में पुलिस द्वारा पेलेट गन का उपयोग भीड़ नियंत्रण की क्रमिक (Graded Response) रणनीति का हिस्सा हो सकता है। हालांकि न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी मामले में पेलेट गन का प्रयोग मनमाने ढंग से या निर्धारित दिशानिर्देशों के विरुद्ध किया गया है, तो ऐसे मामलों की अलग-अलग जांच की जाएगी।
यह मामला केवल कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि मानवाधिकार, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और राज्य की जिम्मेदारी जैसे संवैधानिक प्रश्नों से भी जुड़ा हुआ है।
पेलेट गन क्या है?
पेलेट गन एक ऐसी बंदूक है जिसमें छोटे-छोटे धातु (आमतौर पर सीसे) के छर्रे भरे होते हैं। फायर होने पर ये छर्रे कई दिशाओं में फैल जाते हैं और किसी निश्चित लक्ष्य तक सीमित नहीं रहते।
इसी कारण इसके उपयोग से गंभीर चोटें लग सकती हैं, विशेषकर आंखों में, जिससे स्थायी दृष्टि हानि तक हो सकती है।
सुप्रीम कोर्ट की प्रमुख टिप्पणियाँ
सुनवाई के दौरान न्यायालय ने कहा—
• पुलिस नियमों में विशेष परिस्थितियों में पेलेट गन के उपयोग की अनुमति है।
• भीड़ नियंत्रण के लिए चरणबद्ध (Graded) प्रतिक्रिया अपनाई जानी चाहिए।
• अदालत फिलहाल पेलेट गन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के पक्ष में नहीं है।
• यदि किसी घटना में नियमों का उल्लंघन हुआ है तो उसकी अलग से समीक्षा की जाएगी।
याचिकाकर्ताओं की दलील
याचिका में कहा गया कि—
• पेलेट गन का प्रयोग आवश्यकता (Necessity), आनुपातिकता (Proportionality) और युक्तिसंगतता (Reasonableness) के संवैधानिक सिद्धांतों का उल्लंघन करता है।
• शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर ऐसे हथियारों का प्रयोग लोकतांत्रिक अधिकारों के विरुद्ध है।
न्यायालय की चिंता
न्यायालय ने माना कि छात्रों के शांतिपूर्ण प्रदर्शन से निपटने में राज्य को संयम बरतना चाहिए।
हालाँकि अदालत ने यह भी कहा कि कई बार असामाजिक तत्व किसी शांतिपूर्ण प्रदर्शन को हिंसक रूप दे सकते हैं। ऐसी स्थिति में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस को उचित कार्रवाई करनी पड़ सकती है।
पेलेट गन से जुड़े विवाद
पेलेट गन के उपयोग को लेकर लंबे समय से विवाद रहा है।
मुख्य कारण—
• स्थायी दृष्टि हानि का खतरा।
• बच्चों एवं महिलाओं के घायल होने की घटनाएँ।
• मानवाधिकार संगठनों की आपत्तियाँ।
• भीड़ नियंत्रण के कम घातक विकल्पों की उपलब्धता।
संवैधानिक दृष्टिकोण
यह मुद्दा निम्नलिखित संवैधानिक प्रावधानों से जुड़ा है—
• अनुच्छेद 19 – शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार।
• अनुच्छेद 21 – जीवन एवं व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार।
• राज्य का कर्तव्य—कानून-व्यवस्था बनाए रखना।
इसलिए राज्य को नागरिक अधिकारों और सार्वजनिक सुरक्षा के बीच संतुलन बनाना आवश्यक है।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण
महत्वपूर्ण तथ्य
• पेलेट गन भीड़ नियंत्रण के लिए प्रयुक्त होती है।
• इसमें धातु के छोटे छर्रे होते हैं।
• इसका प्रयोग पुलिस नियमों के अधीन केवल विशेष परिस्थितियों में किया जाता है।
• सर्वोच्च न्यायालय ने पूर्ण प्रतिबंध लगाने से इनकार किया है।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण
जीएस पेपर 2 – राजव्यवस्था एवं शासन
संभावित प्रश्न:
भीड़ नियंत्रण के दौरान बल प्रयोग और मानवाधिकारों के बीच संतुलन स्थापित करना लोकतांत्रिक शासन की सबसे बड़ी चुनौती है। चर्चा कीजिए।
निष्कर्ष
लोकतंत्र में नागरिकों को शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार है, वहीं राज्य पर कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी भी है। इसलिए आवश्यकता ऐसी व्यवस्था की है जिसमें मानवाधिकारों की रक्षा करते हुए पुलिस को प्रभावी एवं उत्तरदायी बनाया जाए। सर्वोच्च न्यायालय की टिप्पणी इसी संतुलित दृष्टिकोण को दर्शाती है।


