13 अक्टूबर 2026 करेंट अफेयर्स हिंदी | UPSC, UPPCS, BPSC

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आज के करेंट अफेयर्स

13 अक्टूबर 2026 | मंगलवार

UPSC • UPPCS • BPSC

प्रारंभिक एवं मुख्य परीक्षा की तैयारी के लिए महत्त्वपूर्ण समसामयिकी

1. खुदरा महँगाई बढ़कर 5.54 प्रतिशत

सामान्य अध्ययन: अर्थव्यवस्था

सितंबर 2026 में भारत की खुदरा महँगाई दर बढ़कर 5.54 प्रतिशत पर पहुँच गई, जबकि अगस्त में यह 4.8 प्रतिशत थी। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, खाद्य पदार्थों और ईंधन की कीमतों में वृद्धि ने महँगाई पर दबाव बढ़ाया। यह अक्टूबर 2024 के बाद का उच्च स्तर बताया गया है।

मुख्य तथ्य

  • उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) खुदरा स्तर पर वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों में बदलाव को मापता है।
  • भारत में खुदरा महँगाई के लिए भारतीय रिजर्व बैंक का मध्यम अवधि लक्ष्य 4 प्रतिशत है, जिसमें 2 प्रतिशत की घट-बढ़ की सीमा है।
  • सितंबर 2026 में महँगाई की दर RBI की 6 प्रतिशत की ऊपरी सहनशीलता सीमा के करीब पहुँची।
  • सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने CPI की नई श्रृंखला का आधार वर्ष 2024=100 किया है।
परीक्षा उपयोगिता: CPI, महँगाई के कारण, मौद्रिक नीति समिति और महँगाई लक्ष्यीकरण।

अभ्यास प्रश्न — खबर 1

प्रारंभिक परीक्षा (MCQ): भारत में खुदरा महँगाई को मापने के लिए मुख्यतः किस सूचकांक का उपयोग किया जाता है?

(A) औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP)
(B) उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI)
(C) थोक व्यापार सूचकांक (WPI) בלבד
(D) मानव विकास सूचकांक (HDI)

उत्तर एवं व्याख्या

सही उत्तर: (B) उपभोक्ता मूल्य सूचकांक खुदरा स्तर पर वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों में बदलाव को मापता है।

मुख्य परीक्षा (GS-3)

प्रश्न: खुदरा महँगाई में वृद्धि के प्रमुख कारणों तथा भारतीय अर्थव्यवस्था और मौद्रिक नीति पर इसके प्रभावों की चर्चा कीजिए। (150 शब्द)

2. अर्थशास्त्र का नोबेल पुरस्कार और आर्थिक स्थिरीकरण

सामान्य अध्ययन: अर्थव्यवस्था

समाचार सामग्री के अनुसार, 2026 का अर्थशास्त्र का नोबेल पुरस्कार अमेरिकी अर्थशास्त्रियों रॉबर्ट ई. हॉल और माइकल वुडफोर्ड को आर्थिक स्थिरीकरण से संबंधित उनके योगदान के लिए दिया गया। उनके कार्य में परिवारों के उपभोग संबंधी निर्णयों, भविष्य की आय के बारे में अपेक्षाओं और कंपनियों के व्यवहार को व्यापक आर्थिक नीतियों से जोड़ने पर बल दिया गया है।

यह क्यों महत्त्वपूर्ण है?

  • परिवारों और कंपनियों के निर्णयों को समझना महँगाई, उत्पादन और रोजगार के रुझानों का विश्लेषण करने में मदद करता है।
  • आर्थिक नीति केवल समग्र आँकड़ों पर नहीं, बल्कि लोगों की अपेक्षाओं और व्यवहार पर भी निर्भर करती है।
  • केंद्रीय बैंक भविष्य की मौद्रिक नीति के बारे में संकेत देकर आर्थिक अपेक्षाओं को प्रभावित कर सकते हैं। इस प्रक्रिया को अग्रिम मार्गदर्शन (Forward Guidance) कहा जाता है।
  • आर्थिक संकटों के प्रभाव सीमाओं के पार फैल सकते हैं; इसलिए देशों के केंद्रीय बैंकों और सरकारों के बीच समन्वय भी महत्त्वपूर्ण है।
परीक्षा उपयोगिता: सूक्ष्म एवं व्यापक अर्थशास्त्र, आर्थिक स्थिरीकरण, उपभोग, अपेक्षाएँ और मौद्रिक नीति।

अभ्यास प्रश्न — खबर 2

प्रारंभिक परीक्षा (MCQ): आर्थिक नीति में भविष्य की आय और महँगाई के बारे में लोगों की अपेक्षाएँ क्यों महत्त्वपूर्ण हैं?

(A) वे उपभोग और निवेश संबंधी निर्णयों को प्रभावित करती हैं।
(B) वे सभी करों को समाप्त कर देती हैं।
(C) वे मुद्रा की आवश्यकता समाप्त करती हैं।
(D) उनका आर्थिक गतिविधियों से कोई संबंध नहीं है।

उत्तर एवं व्याख्या

सही उत्तर: (A) परिवारों और कंपनियों की अपेक्षाएँ उनके उपभोग, बचत, निवेश तथा मूल्य निर्धारण के निर्णयों को प्रभावित कर सकती हैं।

मुख्य परीक्षा (GS-3)

प्रश्न: आर्थिक स्थिरीकरण में जनता की अपेक्षाओं और केंद्रीय बैंक की मौद्रिक नीति की भूमिका स्पष्ट कीजिए। (150 शब्द)

3. हिमालय में बढ़ता तापमान और आपदा जोखिम

सामान्य अध्ययन: पर्यावरण एवं आपदा प्रबंधन

हिंदूकुश-हिमालय क्षेत्र में बढ़ता तापमान हिमनदों और स्थायी रूप से जमी भूमि (परमाफ्रॉस्ट) की स्थिरता को प्रभावित कर रहा है। समाचार सामग्री में IPCC और विश्व मौसम विज्ञान संगठन के हवाले से बताया गया है कि एशिया के ऊँचे पर्वतीय क्षेत्रों में तापमान लगभग 0.3°C प्रति दशक की दर से बढ़ रहा है, जो वैश्विक औसत से लगभग दोगुना है।

प्रमुख प्रभाव

  • हिमनदों का पीछे हटना और बर्फ के नुकसान की दर में वृद्धि।
  • परमाफ्रॉस्ट के पिघलने से चट्टानों और पर्वतीय ढलानों की स्थिरता कम होना।
  • भूस्खलन, चट्टान-हिमखंडों के गिरने, मलबा प्रवाह और अचानक बाढ़ का जोखिम बढ़ना।
  • जल सुरक्षा, पर्वतीय पारिस्थितिकी तंत्र, आजीविका और आधारभूत संरचना पर दबाव।

आगे की राह

हिमनदीय झीलों और संवेदनशील ढलानों की निगरानी, उपग्रह एवं ड्रोन आधारित निरीक्षण, वास्तविक समय में चेतावनी प्रणालियाँ, जोखिम-संवेदनशील निर्माण और क्षेत्रीय सहयोग को मजबूत करना आवश्यक है।

परीक्षा उपयोगिता: जलवायु परिवर्तन, हिमनद, परमाफ्रॉस्ट, हिमनदीय झील विस्फोट बाढ़ और आपदा जोखिम न्यूनीकरण।

अभ्यास प्रश्न — खबर 3

प्रारंभिक परीक्षा (MCQ): हिंदूकुश-हिमालय क्षेत्र में परमाफ्रॉस्ट के पिघलने से कौन-सा जोखिम बढ़ सकता है?

(A) पर्वतीय ढलानों की स्थिरता में वृद्धि
(B) भूस्खलन और चट्टानों के गिरने का जोखिम
(C) समुद्री लवणता में कमी
(D) मरुस्थलीय क्षेत्रों में हिमनदों का निर्माण

उत्तर एवं व्याख्या

सही उत्तर: (B) परमाफ्रॉस्ट के पिघलने से पर्वतीय ढलानों और चट्टानों की स्थिरता कमजोर हो सकती है, जिससे भूस्खलन सहित अन्य आपदाओं का जोखिम बढ़ता है।

मुख्य परीक्षा (GS-3)

प्रश्न: जलवायु परिवर्तन के कारण हिंदूकुश-हिमालय क्षेत्र में बढ़ते आपदा जोखिमों की चर्चा कीजिए तथा जोखिम न्यूनीकरण के उपाय सुझाइए। (150 शब्द)

4. निर्वाचन आयोग और मतदाता सूची का पुनरीक्षण

सामान्य अध्ययन: राजव्यवस्था एवं शासन

समाचार सामग्री में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर निर्वाचन आयोग की प्रक्रिया, पारदर्शिता और संस्थागत विश्वसनीयता से जुड़े सवाल उठाए गए हैं। इस बहस का केंद्र मतदाता सूची की शुद्धता सुनिश्चित करने के साथ-साथ पात्र नागरिकों के मतदान अधिकार की रक्षा करना है।

मुख्य बिंदु

  • मतदाता सूची का पुनरीक्षण यह सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है कि सूची में पात्र मतदाताओं के नाम शामिल हों और गलत प्रविष्टियों को सुधारा जा सके।
  • प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए और नागरिकों को नोटिस, सुनवाई तथा अपील के पर्याप्त अवसर मिलने चाहिए।
  • निर्वाचन व्यवस्था में दक्षता के साथ समावेशिता और निष्पक्षता बनाए रखना भी महत्त्वपूर्ण है।
  • भारत में मतदान की आयु 18 वर्ष है। मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने के लिए निर्वाचन आयोग की निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया जाता है।
परीक्षा उपयोगिता: निर्वाचन आयोग, मतदाता सूची, चुनावी पारदर्शिता, लोकतांत्रिक भागीदारी और संवैधानिक संस्थाएँ।

अभ्यास प्रश्न — खबर 4

प्रारंभिक परीक्षा (MCQ): मतदाता सूची के पुनरीक्षण में कौन-सा सिद्धांत सबसे उपयुक्त है?

(A) पात्र नागरिकों को बिना कारण सूची से हटाना
(B) प्रक्रिया को गोपनीय रखकर अपील का अवसर न देना
(C) सूची की शुद्धता के साथ पारदर्शिता और पात्र मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा
(D) केवल शहरी मतदाताओं के नामों की जाँच

उत्तर एवं व्याख्या

सही उत्तर: (C) मतदाता सूची का पुनरीक्षण पारदर्शी होना चाहिए और पात्र नागरिकों को उचित सूचना तथा आपत्ति या अपील का अवसर मिलना चाहिए।

मुख्य परीक्षा (GS-2)

प्रश्न: मतदाता सूची की शुद्धता सुनिश्चित करने और सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार की रक्षा के बीच संतुलन कैसे स्थापित किया जा सकता है? चर्चा कीजिए। (150 शब्द)

5. दक्षिण भारत में सूखे की स्थिति और केंद्र-राज्य की भूमिका

सामान्य अध्ययन: कृषि, अर्थव्यवस्था एवं आपदा प्रबंधन

उपलब्ध समाचार सामग्री के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम मानसून की कमी के बाद कर्नाटक और आंध्र प्रदेश के कुछ क्षेत्रों में सूखे की गंभीर स्थिति बनी है। सूखे का आकलन केवल वर्षा की कमी से नहीं, बल्कि कृषि एवं जल संबंधी संकेतकों और जमीनी सत्यापन के आधार पर किया जाता है।

प्रमुख चुनौतियाँ

  • फसल उत्पादन और किसानों की आय पर प्रतिकूल प्रभाव।
  • जलाशयों, भूजल और पेयजल उपलब्धता पर दबाव।
  • पशुओं के चारे तथा ग्रामीण रोजगार की चुनौती।
  • राहत सहायता और अतिरिक्त वित्तीय सहयोग के लिए समयबद्ध आकलन की आवश्यकता।

सूखा प्रबंधन में सूक्ष्म सिंचाई, कम जल की आवश्यकता वाली फसलों को प्रोत्साहन, जल संरक्षण, कृषि बीमा तथा प्रभावित किसानों तक राहत पहुँचाना महत्त्वपूर्ण है। केंद्र और राज्यों के बीच आकलन तथा सहायता की प्रक्रिया में समयबद्ध समन्वय भी आवश्यक है।

परीक्षा उपयोगिता: सूखा प्रबंधन नियमावली, राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष, जल संरक्षण, कृषि बीमा और जलवायु परिवर्तन।

अभ्यास प्रश्न — खबर 5

प्रारंभिक परीक्षा (MCQ): सूखे की स्थिति का आकलन करने के लिए सबसे उपयुक्त दृष्टिकोण कौन-सा है?

(A) केवल एक दिन की वर्षा देखना
(B) केवल समाचारों में प्रकाशित अनुमान पर निर्भर रहना
(C) वर्षा, कृषि एवं जल संकेतकों और जमीनी सत्यापन का संयुक्त उपयोग
(D) केवल राज्य की जनसंख्या को आधार बनाना

उत्तर एवं व्याख्या

सही उत्तर: (C) सूखे का आकलन वर्षा की कमी के साथ कृषि, जल उपलब्धता और जमीनी स्थितियों जैसे संकेतकों को ध्यान में रखकर किया जाता है।

मुख्य परीक्षा (GS-3)

प्रश्न: भारत में सूखे के कृषि एवं ग्रामीण आजीविका पर पड़ने वाले प्रभावों का विश्लेषण कीजिए। सूखा-रोधी प्रबंधन के उपाय सुझाइए। (150 शब्द)

6. जीवित ग्रह सूचकांक और वन्यजीव आबादियों में गिरावट

सामान्य अध्ययन: पर्यावरण एवं जैव विविधता

जीवित ग्रह सूचकांक (Living Planet Index) की रिपोर्ट वन्यजीवों की निगरानी की गई आबादियों के आकार में समय के साथ होने वाले औसत बदलाव को दर्शाती है। समाचार विश्लेषण में 1970 से 2022 के बीच अध्ययन में शामिल वन्यजीव आबादियों के आकार में औसतन 73 प्रतिशत गिरावट का उल्लेख है।

आँकड़े का सही अर्थ

  • यह आँकड़ा सभी वन्यजीव प्रजातियों के 73 प्रतिशत विलुप्त हो जाने का अर्थ नहीं है।
  • सूचकांक स्तनधारियों, पक्षियों, सरीसृपों, उभयचरों और मछलियों की निगरानी की गई आबादियों के रुझानों पर आधारित है।
  • आवास विनाश, प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक संसाधनों का अत्यधिक दोहन जैव विविधता के लिए प्रमुख खतरे हैं।
  • रिपोर्ट में लैटिन अमेरिका और कैरेबियाई क्षेत्र में सबसे अधिक औसत गिरावट दर्ज होने का उल्लेख है।

जैव विविधता संरक्षण के लिए प्राकृतिक आवासों की रक्षा, अवैध वन्यजीव व्यापार पर नियंत्रण, प्रदूषण में कमी और पारिस्थितिकी तंत्र के पुनर्स्थापन की आवश्यकता है।

परीक्षा उपयोगिता: जैव विविधता, पारिस्थितिकी तंत्र, वन्यजीव संरक्षण और वैश्विक पर्यावरणीय सूचकांक।

अभ्यास प्रश्न — खबर 6

प्रारंभिक परीक्षा (MCQ): जीवित ग्रह सूचकांक में निगरानी की गई वन्यजीव आबादियों के आकार में औसत गिरावट का अर्थ क्या है?

(A) उतने प्रतिशत वन्यजीव प्रजातियाँ निश्चित रूप से विलुप्त हो चुकी हैं।
(B) निगरानी की गई आबादियों के आकार में औसत गिरावट दर्ज हुई है।
(C) पृथ्वी के समस्त वन क्षेत्र में उतनी ही गिरावट हुई है।
(D) सभी प्रजातियों की आबादी हर स्थान पर समान दर से घटी है।

उत्तर एवं व्याख्या

सही उत्तर: (B) यह सूचकांक अध्ययन में शामिल आबादियों के आकार में औसत बदलाव दर्शाता है; इसे प्रजातियों के विलुप्त होने के प्रतिशत के रूप में नहीं पढ़ना चाहिए।

मुख्य परीक्षा (GS-3)

प्रश्न: जैव विविधता में गिरावट के प्रमुख कारणों और पारिस्थितिकी तंत्र पर इसके प्रभावों की चर्चा कीजिए। संरक्षण के प्रभावी उपाय बताइए। (150 शब्द)

7. उल्लास–नव भारत साक्षरता कार्यक्रम और लक्षद्वीप

प्रारंभिक परीक्षा: शिक्षा एवं सामाजिक विकास

समाचार सामग्री के अनुसार, लक्षद्वीप को उल्लास–नव भारत साक्षरता कार्यक्रम के अंतर्गत पूर्ण साक्षर केंद्रशासित प्रदेश घोषित किया गया। उपलब्ध विवरण के अनुसार, द्वीपों में 1,113 ऐसे वयस्कों की पहचान की गई थी जो साक्षरता से वंचित थे। उनके लिए शिक्षण और आकलन अभियान चलाए गए तथा उन्होंने आधारभूत साक्षरता एवं संख्यात्मक आकलन परीक्षा उत्तीर्ण की।

कार्यक्रम की प्रमुख विशेषताएँ

  • उल्लास का पूरा नाम Understanding of Lifelong Learning for All in Society है। इसे नव भारत साक्षरता कार्यक्रम भी कहा जाता है।
  • यह 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के उन लोगों के लिए है जो औपचारिक विद्यालयी शिक्षा से वंचित रह गए।
  • कार्यक्रम का उद्देश्य पढ़ने-लिखने और गणना करने के आधारभूत कौशल विकसित करना है।
  • डिजिटल उपकरणों के उपयोग, वित्तीय गणना और दैनिक जीवन में आवश्यक कौशलों पर भी बल दिया जाता है।
  • शिक्षा मंत्रालय का स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग इसके क्रियान्वयन से जुड़ा प्रमुख विभाग है।
परीक्षा उपयोगिता: वयस्क शिक्षा, आधारभूत साक्षरता एवं संख्यात्मक कौशल, समावेशी विकास और शिक्षा संबंधी सरकारी पहल।

अभ्यास प्रश्न — खबर 7

प्रारंभिक परीक्षा (MCQ): उल्लास–नव भारत साक्षरता कार्यक्रम मुख्यतः किस वर्ग के लिए है?

(A) केवल प्राथमिक विद्यालय के विद्यार्थी
(B) 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के ऐसे लोग जो आधारभूत साक्षरता से वंचित हैं
(C) केवल विश्वविद्यालय के शोधार्थी
(D) केवल सरकारी कर्मचारियों के लिए

उत्तर एवं व्याख्या

सही उत्तर: (B) कार्यक्रम 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के उन लोगों पर केंद्रित है जो औपचारिक विद्यालयी शिक्षा से वंचित रह गए और जिन्हें आधारभूत साक्षरता तथा संख्यात्मक कौशल की आवश्यकता है।

मुख्य परीक्षा (GS-2)

प्रश्न: वयस्क साक्षरता समावेशी विकास और नागरिक सशक्तीकरण में किस प्रकार योगदान देती है? उल्लास कार्यक्रम के संदर्भ में चर्चा कीजिए। (150 शब्द)

आज के करेंट अफेयर्स: त्वरित पुनरावलोकन

  • अर्थव्यवस्था: खुदरा महँगाई, उपभोक्ता मूल्य सूचकांक और आर्थिक स्थिरीकरण।
  • पुरस्कार: अर्थशास्त्र का नोबेल पुरस्कार और आर्थिक नीति में अपेक्षाओं की भूमिका।
  • पर्यावरण: हिमालय का बढ़ता तापमान और जीवित ग्रह सूचकांक।
  • राजव्यवस्था: निर्वाचन आयोग और मतदाता सूची का पुनरीक्षण।
  • कृषि: सूखा आकलन, राहत और जल संरक्षण।
  • सामाजिक विकास: उल्लास कार्यक्रम और वयस्क साक्षरता।

अभ्यास प्रश्न: प्रारंभिक परीक्षा (MCQ)

प्रश्न: जीवित ग्रह सूचकांक (Living Planet Index) में वन्यजीव आबादियों के आकार में औसतन 73 प्रतिशत गिरावट का उल्लेख है। इस आँकड़े की सही व्याख्या क्या है?

(A) विश्व की 73 प्रतिशत वन्यजीव प्रजातियाँ विलुप्त हो चुकी हैं।
(B) निगरानी की गई वन्यजीव आबादियों के आकार में औसत गिरावट दर्ज हुई है।
(C) पृथ्वी के कुल वन क्षेत्र में 73 प्रतिशत की कमी दर्ज हुई है।
(D) सभी वन्यजीवों की संख्या प्रत्येक क्षेत्र में 73 प्रतिशत घटी है।

सही उत्तर एवं व्याख्या देखें

सही उत्तर: (B)

जीवित ग्रह सूचकांक निगरानी की गई वन्यजीव आबादियों के आकार में समय के साथ औसत बदलाव दर्शाता है। 73 प्रतिशत की गिरावट का अर्थ यह नहीं है कि 73 प्रतिशत प्रजातियाँ विलुप्त हो गई हैं।

अभ्यास प्रश्न: मुख्य परीक्षा (GS-3)

प्रश्न: जलवायु परिवर्तन के कारण हिंदूकुश-हिमालय क्षेत्र में बढ़ते तापमान और हिमनदों के क्षरण से उत्पन्न आपदा जोखिमों की चर्चा कीजिए। इन जोखिमों को कम करने के लिए आवश्यक उपाय सुझाइए। (150 शब्द)

उत्तर लेखन संकेत: हिमनद एवं परमाफ्रॉस्ट का पिघलना, भूस्खलन और अचानक बाढ़ का जोखिम, जल सुरक्षा तथा आजीविका पर प्रभाव; निगरानी, पूर्व चेतावनी, जोखिम-संवेदनशील निर्माण और क्षेत्रीय सहयोग।

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