14 सितंबर 2026 की करेंट अफेयर्स | UPSC, PCS प्रारंभिक एवं मुख्य परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण समसामयिकी

ARIvidya दैनिक समसामयिकी — 14 सितंबर 2026
ARIvidya

दैनिक समसामयिकी

14 सितंबर 2026 • सोमवार
समसामयिकी • अंतरराष्ट्रीय संबंध

1. ब्रिक्स का विस्तार और भारत की रणनीति

मुख्य बिंदु: ब्रिक्स के विस्तार ने वैश्विक दक्षिण की भूमिका को मजबूत किया है, लेकिन भारत के सामने चीन के बढ़ते प्रभाव के बीच अपने रणनीतिक हितों को संतुलित रखने की चुनौती भी है।
क्या समझना आवश्यक है?
  • ब्रिक्स का मूल उद्देश्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच सहयोग बढ़ाना था।
  • समय के साथ संगठन का विस्तार हुआ है और इसकी सदस्यता में वृद्धि हुई है।
  • विस्तार से वैश्विक दक्षिण की सामूहिक आवाज को अधिक महत्व मिल सकता है।
  • भारत बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था और रणनीतिक स्वायत्तता पर जोर देता है।
  • भारत के लिए चुनौती यह है कि ब्रिक्स मंच का उपयोग सहयोग के लिए हो, लेकिन किसी एक शक्ति के प्रभाव का साधन न बने।
भारत के लिए महत्व
भारत ब्रिक्स को पश्चिम-विरोधी मंच के रूप में देखने के बजाय बहुपक्षीय सहयोग, वैश्विक दक्षिण की आवाज, आर्थिक सहयोग तथा वैश्विक संस्थाओं में सुधार के मंच के रूप में उपयोग कर सकता है।
प्रारंभिक परीक्षा
प्रश्न: ब्रिक्स के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
  • (क) इसका उद्देश्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच सहयोग बढ़ाना है।
  • (ख) इसका विस्तार वैश्विक दक्षिण की प्रतिनिधित्व क्षमता को प्रभावित करता है।
  • (ग) भारत ब्रिक्स को केवल सैन्य गठबंधन के रूप में देखता है।
उत्तर: केवल (क) और (ख)
मुख्य परीक्षा प्रश्न:
ब्रिक्स के विस्तार ने वैश्विक दक्षिण की भूमिका को किस प्रकार प्रभावित किया है? भारत के रणनीतिक हितों के संदर्भ में चर्चा कीजिए।
समसामयिकी • अर्थव्यवस्था

2. न्यू डेवलपमेंट बैंक और स्थानीय मुद्रा में वित्तपोषण

मुख्य बिंदु: न्यू डेवलपमेंट बैंक द्वारा स्थानीय मुद्राओं में वित्तपोषण बढ़ाने की दिशा में प्रयास वैश्विक वित्तीय व्यवस्था में विविधता लाने की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं।
न्यू डेवलपमेंट बैंक क्या है?

न्यू डेवलपमेंट बैंक ब्रिक्स देशों द्वारा स्थापित बहुपक्षीय विकास बैंक है। इसका उद्देश्य सदस्य देशों तथा अन्य विकासशील अर्थव्यवस्थाओं में अवसंरचना और सतत विकास परियोजनाओं के लिए वित्त उपलब्ध कराना है।

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स्थानीय मुद्रा में ऋण का महत्व
  • विदेशी मुद्रा पर निर्भरता को कम किया जा सकता है।
  • मुद्रा विनिमय जोखिम को सीमित करने में सहायता मिल सकती है।
  • स्थानीय पूंजी बाजारों के विकास को बढ़ावा मिल सकता है।
  • विकासशील देशों के लिए वैकल्पिक वित्तीय व्यवस्था मजबूत हो सकती है।
भारत के संदर्भ में रुपये में वित्तपोषण और रुपये के बांड कार्यक्रम स्थानीय मुद्रा आधारित वित्तीय व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकते हैं।
प्रारंभिक परीक्षा
प्रश्न: न्यू डेवलपमेंट बैंक के संबंध में कौन-सा कथन सही है?
  • (क) यह ब्रिक्स देशों द्वारा स्थापित बहुपक्षीय विकास बैंक है।
  • (ख) इसका मुख्य उद्देश्य केवल सैन्य परियोजनाओं को वित्त देना है।
  • (ग) यह स्थानीय मुद्रा में वित्तपोषण को बढ़ावा दे सकता है।
उत्तर: (क) और (ग)
मुख्य परीक्षा प्रश्न:
स्थानीय मुद्राओं में विकास वित्तपोषण वैश्विक वित्तीय व्यवस्था में किस प्रकार परिवर्तन ला सकता है? भारत के संदर्भ में चर्चा कीजिए।
समसामयिकी • आंतरिक सुरक्षा

3. आतंकवाद का बदलता स्वरूप और भारत की नई रणनीति

मुख्य बिंदु: भारत की आतंकवाद-रोधी नीति अब केवल आतंकवादी घटनाओं की प्रतिक्रिया तक सीमित न रहकर पूर्व-रोकथाम, खुफिया समन्वय, त्वरित कार्रवाई और पूरे समाज की भागीदारी पर केंद्रित हो रही है।
रणनीति में परिवर्तन
  • आतंकवादी गतिविधियों की रोकथाम पर अधिक जोर।
  • खुफिया एजेंसियों के बीच समन्वय को मजबूत करना।
  • आतंकवाद के वित्तपोषण पर रोक लगाना।
  • सीमा-पार आतंकवाद के विरुद्ध प्रभावी प्रतिक्रिया।
  • केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय।
  • पूरे समाज को आतंकवाद के विरुद्ध लामबंद करना।
भारत की कार्रवाई का विकास

वर्ष 2016 के उरी हमले के बाद की सर्जिकल स्ट्राइक, वर्ष 2019 की बालाकोट कार्रवाई और वर्ष 2025 की ऑपरेशन सिंदूर जैसी कार्रवाइयों ने भारत की आतंकवाद-रोधी प्रतिक्रिया के स्वरूप में परिवर्तन को रेखांकित किया है।

वर्ष 2026 की राष्ट्रीय आतंकवाद-रोधी नीति और रणनीति का व्यापक दृष्टिकोण पूरे शासन तंत्र तथा समाज की भागीदारी पर आधारित आतंकवाद-रोधी व्यवस्था की ओर संकेत करता है।
प्रारंभिक परीक्षा
प्रश्न: प्रभावी आतंकवाद-रोधी रणनीति में निम्नलिखित में से कौन-कौन से तत्व महत्वपूर्ण हैं?
  • (क) खुफिया जानकारी का समन्वय
  • (ख) आतंकवाद के वित्तपोषण पर रोक
  • (ग) अंतर-एजेंसी सहयोग
  • (घ) केवल सैन्य कार्रवाई
उत्तर: (क), (ख) और (ग)
मुख्य परीक्षा प्रश्न:
भारत में आतंकवाद-रोधी रणनीति के बदलते स्वरूप का विश्लेषण कीजिए। प्रभावी आतंकवाद-रोधी व्यवस्था में राज्य और समाज की भूमिका पर चर्चा कीजिए।
समसामयिकी • अंतरराष्ट्रीय संगठन

4. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार की आवश्यकता

मुख्य बिंदु: वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की संरचना और निर्णय प्रक्रिया को अधिक प्रतिनिधित्वपूर्ण, प्रभावी और समकालीन विश्व व्यवस्था के अनुरूप बनाने की आवश्यकता है।
मुख्य समस्या

सुरक्षा परिषद में मतभेद और वीटो व्यवस्था कई महत्वपूर्ण वैश्विक संकटों पर सामूहिक कार्रवाई को सीमित कर सकती है। इससे संयुक्त राष्ट्र की प्रभावशीलता और विश्वसनीयता पर प्रश्न उठते हैं।

सुधार की आवश्यकता क्यों?
  • वर्तमान परिषद की संरचना द्वितीय विश्व युद्ध के बाद की शक्ति-संरचना को दर्शाती है।
  • एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका का प्रतिनिधित्व अपर्याप्त माना जाता है।
  • आज की वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक वास्तविकताएँ बदल चुकी हैं।
  • बहुपक्षीय संस्थाओं में विकासशील देशों की भागीदारी बढ़ाना आवश्यक है।
भारत लंबे समय से सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता सहित व्यापक सुधार की मांग करता रहा है। भारत का तर्क है कि समकालीन वैश्विक शक्ति-संतुलन को संस्थागत संरचना में पर्याप्त प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए।
प्रारंभिक परीक्षा
प्रश्न: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार की मांग का प्रमुख आधार क्या है?
  • (क) वर्तमान वैश्विक शक्ति-संरचना में परिवर्तन
  • (ख) विकासशील देशों का अपर्याप्त प्रतिनिधित्व
  • (ग) वैश्विक शासन को अधिक प्रतिनिधित्वपूर्ण बनाना
  • (घ) संयुक्त राष्ट्र को समाप्त करना
उत्तर: (क), (ख) और (ग)
मुख्य परीक्षा प्रश्न:
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार की आवश्यकता का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए। इसमें भारत की भूमिका और दावेदारी पर चर्चा कीजिए।
समसामयिकी • सामाजिक न्याय

5. दिव्यांगजन आरक्षण: समान अवसर और न्यायिक संरक्षण

मुख्य बिंदु: दिव्यांगजन के लिए आरक्षण केवल औपचारिक प्रावधान नहीं है, बल्कि समान अवसर और समावेशी विकास सुनिश्चित करने का महत्वपूर्ण साधन है।
मुद्दा क्या है?

दिव्यांगता प्रमाण-पत्र और आरक्षण के लिए पात्रता का प्रश्न कई बार अभ्यर्थियों के शैक्षणिक और रोजगार संबंधी अधिकारों से जुड़ जाता है। ऐसे मामलों में प्रमाण-पत्र की वैधता, चिकित्सकीय मूल्यांकन तथा प्रशासनिक निर्णय महत्वपूर्ण हो जाते हैं।

संवैधानिक आधार
  • समानता का अधिकार।
  • समान अवसर का सिद्धांत।
  • सामाजिक न्याय और समावेशन।
  • दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 का महत्व।
दिव्यांगजन आरक्षण का उद्देश्य केवल प्रतिनिधित्व बढ़ाना नहीं, बल्कि शिक्षा, रोजगार और सार्वजनिक जीवन में वास्तविक समान अवसर उपलब्ध कराना है।
प्रशासनिक चुनौती

प्रमाण-पत्रों के संबंध में अलग-अलग चिकित्सकीय आकलन, प्रशासनिक व्याख्या और पात्रता संबंधी विवाद अभ्यर्थियों के अधिकारों को प्रभावित कर सकते हैं। ऐसे मामलों में पारदर्शी और न्यायसंगत प्रक्रिया आवश्यक है।

प्रारंभिक परीक्षा
प्रश्न: दिव्यांगजन आरक्षण का मूल उद्देश्य निम्नलिखित में से क्या है?
  • (क) समान अवसर सुनिश्चित करना
  • (ख) सामाजिक समावेशन को बढ़ावा देना
  • (ग) शिक्षा और रोजगार में प्रतिनिधित्व बढ़ाना
  • (घ) केवल आर्थिक सहायता प्रदान करना
उत्तर: (क), (ख) और (ग)
मुख्य परीक्षा प्रश्न:
दिव्यांगजन आरक्षण को सामाजिक न्याय और समान अवसर के साधन के रूप में समझाइए। इसके प्रभावी क्रियान्वयन में आने वाली प्रमुख चुनौतियों की चर्चा कीजिए।

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