18 सितंबर 2026 समसामयिकी: यूपीएससी एवं पीसीएस के लिए 5 महत्वपूर्ण विषय

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18 सितंबर 2026 समसामयिकी

यूपीएससी एवं पीसीएस के लिए पाँच चयनित महत्वपूर्ण विषय

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प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा और अवधारणा-आधारित अभ्यास

18 सितंबर 2026 • शुक्रवार

विषय 1अंतरराष्ट्रीय संबंधऊर्जा सुरक्षाजीएस-2जीएस-3

अमेरिका का रूस-संबंधित प्रतिबंध विधेयक और भारत पर संभावित 100 प्रतिशत तक शुल्क

अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने 16 सितंबर 2026 को रूस के ऊर्जा क्षेत्र को लक्षित करने वाला विधेयक पारित किया। विधेयक में रूस से तेल और गैस खरीदने वाले कुछ देशों पर 100 प्रतिशत तक शुल्क लगाने का अधिकार अमेरिकी राष्ट्रपति को देने का प्रावधान है। भारत के संदर्भ में यह मुद्दा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि जुलाई 2026 में भारत के कुल तेल आयात में रूसी तेल की हिस्सेदारी 51 प्रतिशत से अधिक रही।

मुख्य तथ्य

  • जुलाई 2026 में भारत ने रूस से लगभग 110.4 लाख टन कच्चा तेल आयात किया।
  • रूसी तेल का हिस्सा भारत के कुल तेल आयात में लगभग 52 प्रतिशत रहा, जो उपलब्ध आँकड़ों में उस समय का सर्वाधिक हिस्सा था।
  • जुलाई में रूस से तेल आयात पर भारत का व्यय लगभग 7.3 अरब डॉलर रहा।
  • भारत ने कहा है कि उसकी ऊर्जा सुरक्षा के लिए ऊर्जा स्रोतों का विविधीकरण महत्वपूर्ण है और वह अपने व्यापार तथा आर्थिक हितों की रक्षा करेगा।
परीक्षा दृष्टि: यह विषय ऊर्जा सुरक्षा, द्वितीयक प्रतिबंध, व्यापारिक दबाव, रणनीतिक स्वायत्तता और भारत-अमेरिका संबंधों के अंतर्संबंध को समझने के लिए महत्वपूर्ण है।

प्रारंभिक परीक्षा प्रश्न

अमेरिका द्वारा पारित रूस-संबंधित विधेयक के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?

  1. यह रूस से तेल खरीदने वाले सभी देशों पर स्वतः 100 प्रतिशत शुल्क लागू करता है।
  2. यह अमेरिकी राष्ट्रपति को कुछ देशों पर रूस से तेल और गैस खरीदने के कारण 100 प्रतिशत तक शुल्क लगाने का अधिकार देने का प्रावधान करता है।
  3. यह केवल यूरोपीय देशों पर शुल्क लगाने का प्रावधान करता है।
  4. यह भारत के रूसी तेल आयात को तत्काल प्रतिबंधित करता है।
उत्तर: B — विधेयक अमेरिकी राष्ट्रपति को निर्धारित परिस्थितियों में कुछ देशों पर 100 प्रतिशत तक शुल्क लगाने का अधिकार देने का प्रावधान करता है।

मुख्य परीक्षा प्रश्न

रूस से भारतीय कच्चे तेल के आयात पर अमेरिकी प्रतिबंधात्मक दबाव के संदर्भ में भारत की ऊर्जा सुरक्षा और रणनीतिक स्वायत्तता की चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए।

जीएस-2: अंतरराष्ट्रीय संबंध | जीएस-3: ऊर्जा सुरक्षा और अर्थव्यवस्था

विषय 2व्यापार नीतिजलवायु नीतिजीएस-2जीएस-3

भारत–यूरोपीय संघ व्यापार समझौता: इस्पात कोटा और कार्बन सीमा समायोजन तंत्र

यूरोपीय संघ द्वारा जुलाई 2026 से कुछ इस्पात आयातों पर संशोधित कोटा व्यवस्था लागू किए जाने के बीच भारत ने व्यापार समझौते में इस्पात संबंधी रियायतों को पहले से लागू कराने में सफलता हासिल की है। उपलब्ध विवरण के अनुसार भारत का कोटा 16.5 लाख टन से बढ़कर 19 लाख टन हुआ और अवशिष्ट कोटे को मिलाकर संभावित कुल कोटा 28 लाख टन तक पहुँच सकता है।

मुख्य तथ्य

  • भारत का प्रारंभिक कोटा 16.5 लाख टन था।
  • जुलाई 2026 में लागू व्यवस्था के समय भारत का कोटा 19 लाख टन तक विस्तारित हुआ।
  • अवशिष्ट कोटे सहित संभावित कुल कोटा 28 लाख टन बताया गया है।
  • कोटे के भीतर निर्यात होने पर भी भारतीय इस्पात उत्पादकों को यूरोपीय संघ के कार्बन सीमा समायोजन तंत्र का भुगतान करना होगा।
  • भारत घरेलू स्तर पर कार्बन उत्सर्जन सत्यापन की क्षमता विकसित करने और भारतीय सत्यापन एजेंसियों को मान्यता दिलाने पर काम कर रहा है।
परीक्षा दृष्टि: यह विषय मुक्त व्यापार समझौते, संरक्षणवाद, कार्बन-आधारित व्यापार उपायों, निर्यात प्रतिस्पर्धा और जलवायु नीति के संगम को समझने के लिए महत्वपूर्ण है।

प्रारंभिक परीक्षा प्रश्न

भारत–यूरोपीय संघ इस्पात व्यापार के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?

  1. कोटे के भीतर आने वाले भारतीय इस्पात पर कार्बन सीमा समायोजन तंत्र लागू नहीं होगा।
  2. भारत का कुल संभावित इस्पात कोटा अवशिष्ट कोटे सहित 28 लाख टन तक बताया गया है।
  3. यूरोपीय संघ ने भारत के लिए सभी इस्पात आयात प्रतिबंध समाप्त कर दिए हैं।
  4. भारत को कार्बन उत्सर्जन सत्यापन की कोई आवश्यकता नहीं होगी।
उत्तर: B — अवशिष्ट कोटे सहित भारत का संभावित कुल कोटा 28 लाख टन तक बताया गया है; कार्बन सीमा समायोजन तंत्र अलग से लागू रहेगा।

मुख्य परीक्षा प्रश्न

कार्बन सीमा समायोजन तंत्र जैसे जलवायु-आधारित व्यापार उपाय भारत के निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता को किस प्रकार प्रभावित कर सकते हैं? भारत के लिए नीतिगत विकल्पों की चर्चा कीजिए।

जीएस-2: अंतरराष्ट्रीय व्यापार | जीएस-3: उद्योग, जलवायु और अर्थव्यवस्था

विषय 3ऊर्जा सुरक्षापश्चिम एशियाजीएस-2जीएस-3

पश्चिम एशिया तनाव और भारत की कच्चे तेल की आयात सुरक्षा

पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच अगस्त 2026 में भारत के कच्चे तेल के आयात की मात्रा लगभग 3 प्रतिशत घटी, लेकिन आयात पर व्यय पिछले वर्ष के समान महीने की तुलना में लगभग 18.2 प्रतिशत बढ़ गया। अगस्त में भारतीय कच्चे तेल की औसत कीमत लगभग 90.19 डॉलर प्रति बैरल रही, जबकि जुलाई में यह 82.04 डॉलर और अगस्त 2025 में 69.11 डॉलर प्रति बैरल थी।

मुख्य तथ्य

  • अगस्त 2026 में भारत ने लगभग 1.9 करोड़ टन कच्चा तेल आयात किया।
  • इस पर लगभग 11.7 अरब डॉलर खर्च हुए।
  • कच्चे तेल की आयात मात्रा पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 3 प्रतिशत कम रही।
  • आयात व्यय लगभग 18.2 प्रतिशत अधिक रहा।
  • भारत के लिए समुद्री मार्ग, तेल की कीमत, आपूर्ति स्रोतों का विविधीकरण और रणनीतिक भंडार ऊर्जा सुरक्षा के प्रमुख घटक हैं।
परीक्षा दृष्टि: भारत अपनी ऊर्जा आवश्यकता का बड़ा हिस्सा आयात से पूरा करता है। इसलिए पश्चिम एशिया में संघर्ष, समुद्री मार्गों में व्यवधान और तेल कीमतों में वृद्धि चालू खाते, मुद्रास्फीति और आर्थिक विकास पर प्रभाव डाल सकती है।

प्रारंभिक परीक्षा प्रश्न

अगस्त 2026 में भारत के कच्चे तेल आयात के बारे में निम्नलिखित में से कौन-सा सही है?

  1. आयात मात्रा और आयात व्यय दोनों में भारी कमी हुई।
  2. आयात मात्रा लगभग 3 प्रतिशत घटी, जबकि आयात व्यय लगभग 18.2 प्रतिशत बढ़ा।
  3. आयात मात्रा 18.2 प्रतिशत बढ़ी और व्यय 3 प्रतिशत घटा।
  4. भारत ने अगस्त में कच्चे तेल का आयात बंद कर दिया।
उत्तर: B — उपलब्ध सरकारी आँकड़ों के अनुसार मात्रा लगभग 3 प्रतिशत घटी, लेकिन आयात व्यय लगभग 18.2 प्रतिशत बढ़ा।

मुख्य परीक्षा प्रश्न

पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव भारत की ऊर्जा सुरक्षा को किस प्रकार प्रभावित करता है? दीर्घकालिक ऊर्जा लचीलापन बढ़ाने के उपाय सुझाइए।

जीएस-2: अंतरराष्ट्रीय संबंध | जीएस-3: ऊर्जा, मुद्रास्फीति और अर्थव्यवस्था

विषय 4शासनन्यायपालिकानागरिक समाजजीएस-2

विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम और दिल्ली उच्च न्यायालय का महत्वपूर्ण निर्णय

दिल्ली उच्च न्यायालय ने कॉमनवेल्थ ह्यूमन राइट्स इनिशिएटिव को उसके आरक्षित कोष से 20 लाख रुपये परिचालन खर्च के लिए निकालने की अनुमति देने वाले अंतरिम आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार किया। संस्था का विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम के अंतर्गत पंजीकरण रद्द किया जा चुका था। न्यायालय ने कहा कि पंजीकरण रद्द होने का अर्थ यह नहीं है कि संस्था काम करना बंद कर देती है; प्रभाव यह है कि वह विदेशी अंशदान प्राप्त नहीं कर सकती।

मुख्य तथ्य

  • एकल न्यायाधीश ने 19 मई 2026 को संस्था को बैंक ऑफ इंडिया में रखे आरक्षित कोष से 20 लाख रुपये निकालने की अनुमति दी थी।
  • उपयोग नियमित परिचालन खर्चों के लिए और चार्टर्ड लेखाकार द्वारा प्रमाणीकरण के अधीन था।
  • केंद्र ने इस आदेश के विरुद्ध अपील की, जिसे मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ ने खारिज कर दिया।
  • संस्था के अनुसार उसका पंजीकरण 12 सितंबर 2024 को रद्द किया गया था और उसे सुनवाई का अवसर नहीं दिया गया था।
  • पंजीकरण पहले जून 2021 में निलंबित किया गया था।
परीक्षा दृष्टि: यह विषय विदेशी अंशदान विनियमन, नागरिक समाज संगठनों की कार्यक्षमता, प्राकृतिक न्याय और न्यायिक समीक्षा के बीच संतुलन को समझने के लिए महत्वपूर्ण है।

प्रारंभिक परीक्षा प्रश्न

दिल्ली उच्च न्यायालय के निर्णय के संदर्भ में कौन-सा कथन सही है?

  1. विदेशी अंशदान पंजीकरण रद्द होने पर संस्था स्वतः समाप्त हो जाती है।
  2. पंजीकरण रद्द होने के बाद संस्था विदेशी अंशदान प्राप्त नहीं कर सकती, लेकिन इससे उसका अस्तित्व स्वतः समाप्त नहीं होता।
  3. पंजीकरण रद्द होने पर संस्था अपने सभी घरेलू कोष भी खो देती है।
  4. न्यायालय ने सभी विदेशी अंशदान संबंधी नियम समाप्त कर दिए।
उत्तर: B — न्यायालय ने स्पष्ट किया कि पंजीकरण रद्द होने का प्रभाव विदेशी अंशदान प्राप्त करने की क्षमता पर पड़ता है; इससे संस्था का अस्तित्व स्वतः समाप्त नहीं होता।

मुख्य परीक्षा प्रश्न

विदेशी अंशदान के नियमन और नागरिक समाज संगठनों की स्वायत्तता के बीच संतुलन स्थापित करने में प्राकृतिक न्याय की भूमिका का परीक्षण कीजिए।

जीएस-2: शासन, नागरिक समाज और न्यायपालिका

विषय 5जल संसाधनजलविद्युतपूर्वोत्तरजीएस-2जीएस-3

सियांग ऊपरी बहुउद्देशीय परियोजना: जल, ऊर्जा और सामरिक आयाम

अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने सियांग नदी पर प्रस्तावित सियांग ऊपरी बहुउद्देशीय परियोजना को लेकर लोगों और संगठनों की चिंताओं पर संवाद के लिए सरकार के खुले रुख की बात कही। परियोजना की प्रस्तावित क्षमता 11,000 से 12,500 मेगावाट के बीच बताई गई है। सियांग नदी तिब्बत में यारलुंग त्सांगपो के नाम से बहती है।

मुख्य तथ्य

  • परियोजना अरुणाचल प्रदेश में सियांग नदी पर प्रस्तावित है।
  • प्रस्तावित क्षमता 11,000–12,500 मेगावाट के बीच बताई गई है।
  • परियोजना की पूर्व-व्यवहार्यता रिपोर्ट पर लगभग दो वर्षों से चर्चा चलने की बात कही गई है।
  • भारत ने परियोजना को चीन द्वारा यारलुंग त्सांगपो पर प्रस्तावित 60,000 मेगावाट की मेडोग जलविद्युत परियोजना के संदर्भ में भी उचित ठहराया है।
  • पूर्वी सियांग, सियांग, ऊपरी सियांग और पश्चिम सियांग जिलों में कुछ समुदाय विस्थापन, पर्यावरणीय प्रभाव और भूकंपीय जोखिमों को लेकर चिंता जता रहे हैं।
परीक्षा दृष्टि: यह विषय पूर्वोत्तर विकास, अंतरराष्ट्रीय नदी-जल राजनीति, जल सुरक्षा, जलविद्युत क्षमता, आपदा जोखिम और स्थानीय समुदायों की भागीदारी को एक साथ जोड़ता है।

प्रारंभिक परीक्षा प्रश्न

सियांग ऊपरी बहुउद्देशीय परियोजना के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?

  1. यह पश्चिमी भारत में प्रस्तावित सौर ऊर्जा परियोजना है।
  2. यह सियांग नदी पर अरुणाचल प्रदेश में प्रस्तावित 11,000–12,500 मेगावाट क्षमता वाली बहुउद्देशीय परियोजना है।
  3. यह केवल पेयजल आपूर्ति के लिए प्रस्तावित है।
  4. इसकी प्रस्तावित क्षमता 1,000 मेगावाट से कम है।
उत्तर: B — परियोजना अरुणाचल प्रदेश में सियांग नदी पर प्रस्तावित है और इसकी क्षमता 11,000 से 12,500 मेगावाट के बीच बताई गई है।

मुख्य परीक्षा प्रश्न

सियांग ऊपरी बहुउद्देशीय परियोजना के संदर्भ में जल सुरक्षा, जलविद्युत विकास, सीमा-पार नदी राजनीति और स्थानीय समुदायों की चिंताओं के बीच संतुलन की चर्चा कीजिए।

जीएस-2: अंतरराष्ट्रीय संबंध और पूर्वोत्तर | जीएस-3: जल संसाधन, ऊर्जा और पर्यावरण

स्रोत
18 सितंबर 2026 के उपलब्ध समाचारपत्र-सामग्री, विशेषतः द हिंदू में प्रकाशित संबंधित समाचार।

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