17 सितंबर 2026 समसामयिकी
यूपीएससी | पीसीएस — 5 महत्वपूर्ण खबरों का 360° विश्लेषण • प्रारंभिक परीक्षा + मुख्य परीक्षा
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17 सितंबर 2026 • गुरुवार
भारत-पाकिस्तान नौसैनिक जहाजों की टक्कर: समुद्री सुरक्षा और 1991 समझौता
15 सितंबर 2026 को उत्तर अरब सागर में भारतीय नौसेना के एक युद्धपोत और पाकिस्तान नौसेना के युद्धपोत पीएनएस हुनैन के बीच टक्कर हुई। द हिन्दू के अनुसार भारतीय पोत नियमित निगरानी अभियान पर था और घटना अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में हुई। भारत ने पाकिस्तान के प्रभारी राजनयिक को तलब कर कड़ा राजनयिक विरोध दर्ज कराया। भारतीय पक्ष के अनुसार पाकिस्तानी पोत तेज गति से पास आया और असुरक्षित ढंग से दिशा बदली; पाकिस्तान ने घटना को अलग तरीके से प्रस्तुत करते हुए विरोध दर्ज कराया। किसी जनहानि या बड़े नुकसान की सूचना नहीं दी गई।
1991 समझौता
सैन्य अभ्यास, युद्धाभ्यास और सैनिकों की आवाजाही की पूर्व सूचना संबंधी 1991 का समझौता एक द्विपक्षीय विश्वास-निर्माण उपाय है। अनुच्छेद 10 अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में दोनों देशों के नौसैनिक पोतों और पनडुब्बियों को एक-दूसरे से 3 समुद्री मील से कम दूरी पर न आने की बात करता है।
ईसीजेड और समुद्री कानून
विशेष आर्थिक क्षेत्र में तटीय राज्य को संसाधनों पर विशेष आर्थिक अधिकार मिलते हैं; इसे प्रादेशिक समुद्र के बराबर नहीं माना जाता।
रणनीतिक महत्व
अरब सागर में नौसैनिक निगरानी, समुद्री मार्गों की सुरक्षा, ऊर्जा का प्रवाह और संकट प्रबंधन आपस में जुड़े हैं।
क्या सीख?
संचालन संबंधी संवाद, सुरक्षित दूरी, नियमों का पालन और त्वरित राजनयिक तनाव-न्यूनन आकस्मिक तनाव-वृद्धि के जोखिम को घटाते हैं।
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प्रारंभिक परीक्षा प्रश्न
निम्नलिखित में से कौन-सा 1991 के भारत-पाकिस्तान पूर्व सूचना संबंधी समझौते के अनुच्छेद 10 से संबंधित है?
- दोनों देशों के नौसैनिक पोत अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में 3 समुद्री मील से कम दूरी पर नहीं आएँगे।
- दोनों देशों की सभी नौसैनिक गतिविधियाँ केवल प्रादेशिक समुद्री क्षेत्र तक सीमित रहेंगी।
- दोनों देश हर व्यापारी जहाज की पूर्व अनुमति लेंगे।
- दोनों देशों की ईसीजेड की चौड़ाई 3 समुद्री मील होगी।
मुख्य परीक्षा प्रश्न
भारत-पाकिस्तान के बीच समुद्री विश्वास-निर्माण उपायों का सामरिक महत्व स्पष्ट कीजिए। अरब सागर में आकस्मिक नौसैनिक टकरावों को रोकने के लिए आवश्यक उपाय सुझाइए।
जीएस-2: अंतरराष्ट्रीय संबंध | जीएस-3: सुरक्षा
ईपीएफओ की वेतन सीमा ₹15,000 से बढ़कर ₹25,000: सामाजिक सुरक्षा का विस्तार
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने अनिवार्य ईपीएफओ आच्छादन के लिए मासिक वेतन सीमा ₹15,000 से बढ़ाकर ₹25,000 करने को मंजूरी दी है। निर्णय 17 सितंबर 2026 से प्रभावी हुआ। सरकार के अनुसार इससे 51 लाख से अधिक अतिरिक्त कर्मचारी अनिवार्य ईपीएफओ आच्छादन के दायरे में आ सकते हैं। ईपीएफओ के अंतर्गत भविष्य निधि बचत के साथ कर्मचारी पेंशन योजना और कर्मचारी जमा-संबद्ध बीमा योजना जैसे सामाजिक सुरक्षा घटक जुड़े हैं।
क्या बदला?
अनिवार्य आच्छादन की वेतन सीमा ₹15,000 से बढ़कर ₹25,000 प्रति माह हो गई।
किसे लाभ?
₹15,000 से ₹25,000 मासिक वेतन पाने वाले ऐसे कर्मचारी जो पहले मौजूदा सीमा के कारण स्वतः अनिवार्य आच्छादन में नहीं आते थे, नए दायरे में आएँगे।
वित्तीय प्रभाव
द हिन्दू के अनुसार सरकार का वार्षिक व्यय लगभग ₹11,339 करोड़ अनुमानित है; नियोक्ता का योगदान भी बढ़ेगा।
व्यापक महत्व
यह औपचारिकीकरण, सेवानिवृत्ति सुरक्षा, पेंशन संरक्षण और बीमा आच्छादन के विस्तार से जुड़ा कदम है।
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प्रारंभिक परीक्षा प्रश्न
ईपीएफओ की अनिवार्य वेतन सीमा बढ़ाकर कितनी की गई है?
- ₹18,000
- ₹20,000
- ₹25,000
- ₹30,000
मुख्य परीक्षा प्रश्न
भारत में सामाजिक सुरक्षा के सार्वभौमीकरण की दिशा में ईपीएफओ की वेतन सीमा बढ़ाने के निर्णय के संभावित लाभों और चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए।
जीएस-2: कल्याण | जीएस-3: रोजगार, भारतीय अर्थव्यवस्था
‘जनगणना नगर’ की परिभाषा पर पुनर्विचार: भारत के बदलते शहरीकरण की तस्वीर
आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय ने संसदीय समिति के सामने कहा कि चार दशक पुरानी जनगणना नगर की परिभाषा भारत में हो रहे आर्थिक और स्थानिक परिवर्तन को पर्याप्त रूप से नहीं पकड़ती। मौजूदा मानदंड 1981 से अपरिवर्तित हैं। मंत्रालय ने परिनगरीय विस्तार, क्षेत्रीय विविधता और निर्मित क्षेत्र के विस्तार को बेहतर ढंग से पकड़ने के लिए नई सोच की आवश्यकता बताई है।
मौजूदा मानदंड
न्यूनतम आबादी 5,000; कम-से-कम 75% पुरुष मुख्य कार्यबल गैर-कृषि कार्यों में; जनसंख्या घनत्व कम-से-कम 400 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी।
समस्या
केवल पुरुष कार्यबल को मानदंड बनाना, प्रशासनिक सीमा के आधार पर घनत्व निकालना और परिनगरीय बस्तियों को पर्याप्त रूप से न पकड़ना।
संभावित दिशा
उपग्रह चित्रों का अधिक उपयोग और तेजी से शहरीकरण कर रहे क्षेत्रों के लिए संक्रमण क्षेत्र जैसी श्रेणी पर विचार।
क्यों महत्वपूर्ण?
शहरी वर्गीकरण शहरी नियोजन, अवसंरचना, परिवहन, आवास, स्वच्छता और वित्तीय आवंटन को प्रभावित करता है।
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प्रारंभिक परीक्षा प्रश्न
निम्नलिखित में से कौन-सा जनगणना नगर की पारंपरिक परिभाषा का हिस्सा है?
- न्यूनतम आबादी 2,000 और 50% पुरुष गैर-कृषि कार्यबल
- न्यूनतम आबादी 5,000, 75% पुरुष मुख्य कार्यबल गैर-कृषि और घनत्व 400 व्यक्ति/वर्ग किमी
- केवल नगरपालिका की अधिसूचना
- केवल 400 व्यक्ति/वर्ग किमी घनत्व
मुख्य परीक्षा प्रश्न
भारत में जनगणना नगर की परिभाषा में बदलाव की आवश्यकता के संदर्भ में परिनगरीय शहरीकरण और ग्रामीण-शहरी निरंतरता की भूमिका की चर्चा कीजिए।
जीएस-1: शहरीकरण | जीएस-2: शासन
ब्रिक्स में स्थानीय मुद्रा व्यापार: डॉलर से दूरी या व्यावहारिक भुगतान सुधार?
18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के बाद नई दिल्ली घोषणा में सीमा-पार भुगतानों को अधिक कुशल बनाने और ब्रिक्स की स्थानीय मुद्राओं में व्यापार निपटान तथा निवेश को आगे बढ़ाने की बात कही गई। महत्वपूर्ण बात यह है कि घोषणा किसी एक साझा ब्रिक्स मुद्रा को स्थापित नहीं करती। चर्चा का केंद्र व्यावहारिक स्थानीय-मुद्रा निपटान, भुगतान अंतःसंचालनीयता और राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप सहयोग है।
स्थानीय मुद्रा में व्यापार
दो देशों के बीच व्यापार का निपटान उनकी अपनी मुद्राओं में करना, जिससे हर लेन-देन में तीसरे देश की मुद्रा की आवश्यकता कम हो सकती है।
ब्रिक्स की दिशा
घोषणा में स्थानीय मुद्राओं, सीमा-पार भुगतान तंत्र और भुगतान कार्यबल के काम को समर्थन मिला।
भारत की दुविधा
आयात भुगतान, निर्यात प्रतिस्पर्धा, विनिमय दर जोखिम, तरलता, व्यापार असंतुलन और चीन के साथ रणनीतिक-आर्थिक विचार एक साथ काम करते हैं।
साझा मुद्रा से अंतर
स्थानीय मुद्रा में निपटान का अर्थ साझा ब्रिक्स मुद्रा बनाना नहीं है।
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प्रारंभिक परीक्षा प्रश्न
नई दिल्ली घोषणा के संदर्भ में ब्रिक्स स्थानीय मुद्रा व्यापार के बारे में कौन-सा कथन सही है?
- ब्रिक्स ने एक साझा मुद्रा तत्काल लागू कर दी है।
- ब्रिक्स ने स्थानीय मुद्रा में निपटान और सीमा-पार भुगतान तंत्र को आगे बढ़ाने का समर्थन किया है।
- ब्रिक्स ने सभी सदस्य देशों को डॉलर में व्यापार बंद करने को कहा है।
- ब्रिक्स ने विश्व व्यापार संगठन से बाहर एक नया व्यापार समूह बना लिया है।
मुख्य परीक्षा प्रश्न
ब्रिक्स में स्थानीय मुद्रा में व्यापार निपटान को बढ़ावा देने के भारत के लिए संभावित आर्थिक लाभों और रणनीतिक सीमाओं का परीक्षण कीजिए।
जीएस-2: अंतरराष्ट्रीय संबंध | जीएस-3: बाह्य क्षेत्र, व्यापार
परियोजना चीता के चार वर्ष: भारत में 52 चीते और संरक्षण का अगला चरण
17 सितंबर 2026 को परियोजना चीता के भारत में चार वर्ष पूरे हुए। उपलब्ध स्थिति समीक्षा के अनुसार भारत में चीतों की संख्या 52 तक पहुँची है, जिनमें 32 भारत में जन्मे हैं। 49 चीते कूनो राष्ट्रीय उद्यान और 3 गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य में बताए गए हैं। परियोजना का अगला चरण उपयुक्त आवास का विस्तार और एक दीर्घकालिक चीता बहु-आबादी स्थापित करने पर केंद्रित है।
शुरुआत
17 सितंबर 2022 को नामीबिया से लाए गए 8 चीतों के साथ कूनो राष्ट्रीय उद्यान में पुनर्स्थापन कार्यक्रम शुरू हुआ।
चार वर्षों की प्रगति
कार्यक्रम पुनर्प्रवेश से प्रजनन, शावकों के जीवित रहने और खुले वन क्षेत्र के विस्तार की दिशा में आगे बढ़ा है।
स्थानिक विस्तार
कूनो के साथ गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य में भी चीता आबादी का विस्तार हुआ है।
व्यापक संरक्षण
आवास की गुणवत्ता, शिकार आधार, आनुवंशिक विविधता, रोग प्रबंधन, मानव-वन्यजीव सहअस्तित्व और पारिस्थितिक संपर्कता भी महत्वपूर्ण हैं।
परीक्षा उपयोगी प्रमुख शब्द
प्रारंभिक परीक्षा प्रश्न
परियोजना चीता के संदर्भ में 17 सितंबर 2026 के चार-वर्षीय स्थिति के अनुसार भारत में चीतों की संख्या कितनी बताई गई?
- 32
- 45
- 52
- 60
मुख्य परीक्षा प्रश्न
भारत में परियोजना चीता की उपलब्धियों और दीर्घकालिक संरक्षण के लिए आवास विस्तार तथा बहु-आबादी दृष्टिकोण की आवश्यकता का विश्लेषण कीजिए।
जीएस-3: पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी | जैव विविधता संरक्षण


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