समसामयिकी अध्ययन-सामग्री
28–29 अगस्त 2026 | संघ लोक सेवा आयोग एवं प्रादेशिक सिविल सेवा परीक्षाओं के लिए
दो दिनों की महत्वपूर्ण समसामयिकी
यह अध्ययन-सामग्री 28 और 29 अगस्त 2026 की उपलब्ध सामग्री से परीक्षा-दृष्टि से उपयोगी विषयों को चुनकर तैयार की गई है। अनावश्यक प्रचार सामग्री और दोहराव को हटाकर प्रत्येक विषय में तथ्य, पृष्ठभूमि, महत्व तथा मुख्य परीक्षा की उपयोगिता दी गई है।
लोकसभा निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन का प्रश्न एक बार फिर चर्चा में है। जनसंख्या में राज्यों के बीच परिवर्तन तथा लोकसभा में प्रतिनिधित्व के पुनर्समायोजन से जुड़े प्रश्नों के कारण यह विषय भारतीय संघवाद के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
संवैधानिक आधार
- अनुच्छेद 81 लोकसभा में राज्यों के प्रतिनिधित्व को जनसंख्या के अनुरूप रखने का आधार देता है।
- अनुच्छेद 82 प्रत्येक जनगणना के बाद सीटों के पुनर्समायोजन का प्रावधान करता है।
- 42वाँ संविधान संशोधन, 1976 के माध्यम से 1971 की जनगणना के आधार पर राज्यों के बीच लोकसभा सीटों के पुनर्वितरण को रोक दिया गया।
- 84वें संविधान संशोधन द्वारा इस व्यवस्था को 2026 के बाद होने वाली पहली जनगणना के आँकड़े प्रकाशित होने तक बढ़ाया गया।
उदाहरण
उपलब्ध सामग्री में उत्तर प्रदेश की लोकसभा सीटें 80 से 120 तथा तमिलनाडु की 39 से लगभग 59 होने का उदाहरण दिया गया है। अनुपात लगभग समान रहने पर भी दोनों राज्यों के बीच वास्तविक सीटों का अंतर बढ़ जाएगा।
प्याज की बढ़ती कीमतों के बीच केंद्र सरकार ने जमाखोरी, कालाबाजारी और अनुचित लाभार्जन को कीमत बढ़ने के प्रमुख कारणों में बताया। दिल्ली में प्याज का भाव ₹62 प्रति किलोग्राम बताया गया, जबकि रियायती बिक्री के लिए ₹35 प्रति किलोग्राम की दर रखी गई।
सरकारी उपाय
- राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ (नैफेड) और राष्ट्रीय सहकारी उपभोक्ता संघ (एनसीसीएफ) के माध्यम से प्याज की बिक्री।
- खुदरा दुकानों तथा केंद्रीय भंडारों के माध्यम से उपलब्धता।
- मूल्य स्थिरीकरण उपायों के माध्यम से उपभोक्ताओं को राहत।
नैफेड
- स्थापना: 1958
- कृषि उपज की खरीद और विपणन की प्रमुख सहकारी संस्था।
- बहु-राज्य सहकारी समितियाँ अधिनियम, 2002 के अंतर्गत पंजीकृत।
एनसीसीएफ
- उपभोक्ता सहकारी समितियों की शीर्ष संस्था।
- उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के अंतर्गत कार्य करती है।
- बहु-राज्य सहकारी समितियाँ अधिनियम, 2002 के अंतर्गत पंजीकृत।
हिमालयी क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन और बढ़ते मानवीय हस्तक्षेप के कारण हिमनद झील विस्फोट बाढ़ एक गंभीर आपदा जोखिम बन रही है। उपलब्ध सामग्री में नेपाल की विनाशकारी बाढ़ के संदर्भ में हिमनद के टूटने अथवा बर्फ-चट्टान हिमस्खलन, उसके बाद नदी में अस्थायी अवरोध और उसके अचानक टूटने की संभावना बताई गई है।
हिमनद झील विस्फोट बाढ़ क्या है?
जब हिमनद से बनी झील का प्राकृतिक अवरोध अचानक टूट जाता है और बड़ी मात्रा में पानी, बर्फ, चट्टान तथा मलबा तेजी से नीचे की ओर बहता है, तो उसे हिमनद झील विस्फोट बाढ़ कहा जाता है।
मुख्य कारण
- जलवायु परिवर्तन के कारण हिमनदों का पिघलना।
- हिमनद झीलों का विस्तार।
- हिमनद का अचानक टूटना तथा बर्फ-चट्टान हिमस्खलन।
- नदी मार्ग में मलबे का अस्थायी अवरोध।
- हिमालय में बढ़ता अवसंरचनात्मक एवं मानवीय हस्तक्षेप।
भारत की संवेदनशीलता
उपलब्ध सामग्री के अनुसार भारतीय हिमालय में लगभग 7,500 हिमनद झीलें और लगभग 15,000 हिमनद हैं। अक्टूबर 2023 में सिक्किम की दक्षिण ल्होनाक झील से जुड़ी घटना इसकी गंभीरता का प्रमुख उदाहरण है।
तैयारी के उपाय
- उपग्रह एवं दूरसंवेदी तकनीक से निरंतर निगरानी।
- जोखिम वाली हिमनद झीलों का मानचित्रण।
- पूर्व चेतावनी प्रणालियों का विस्तार।
- स्थानीय समुदायों की आपदा तैयारी।
- सीमा-पार सूचना एवं जल-आँकड़ों का साझा उपयोग।
मध्य एशिया भारत के लिए केवल भौगोलिक क्षेत्र नहीं, बल्कि ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण पड़ोस है। यह क्षेत्र रूस और चीन के बीच स्थित है तथा भारत की यूरेशियाई रणनीति में इसका विशेष महत्व है।
मध्य एशिया के पाँच प्रमुख देश
भारत के लिए महत्व
- ऊर्जा सुरक्षा।
- आतंकवाद-विरोधी सहयोग।
- यूरेशियाई संपर्क एवं व्यापार।
- अफगानिस्तान के संदर्भ में रणनीतिक सहयोग।
- चीन की बढ़ती उपस्थिति के बीच रणनीतिक संतुलन।
शंघाई सहयोग संगठन
शंघाई सहयोग संगठन की शुरुआत 1996 में “शंघाई फाइव” के रूप में हुई थी। 2001 में उज़्बेकिस्तान के शामिल होने के बाद इसका विस्तार हुआ। भारत और पाकिस्तान 2017 में इसके सदस्य बने। उपलब्ध सामग्री के अनुसार इसके 10 सदस्य, 15 संवाद साझेदार और 2 पर्यवेक्षक हैं।
भारत में अग्नि दुर्घटनाओं का स्वरूप बदल रहा है। औद्योगिक प्रतिष्ठानों के अतिरिक्त आवासीय भवनों, होटलों और अस्पतालों, विशेषकर गहन चिकित्सा कक्षों तथा नवजात गहन चिकित्सा कक्षों में आग की घटनाएँ गंभीर चिंता बन रही हैं।
गहन चिकित्सा कक्ष अधिक संवेदनशील क्यों?
- ऑक्सीजन-समृद्ध वातावरण।
- बड़ी संख्या में विद्युत एवं इलेक्ट्रॉनिक उपकरण।
- रोगियों की स्वयं बाहर निकलने की सीमित क्षमता।
- बंद स्थानों में धुआँ तेजी से भरना।
- अधिक भार वाली विद्युत प्रणालियाँ।
आवश्यक सुरक्षा उपाय
- स्वतंत्र निकास मार्ग और क्षैतिज निकासी की सुविधा।
- स्वचालित जल छिड़काव प्रणाली।
- महत्वपूर्ण उपकरणों के लिए स्वतंत्र विद्युत आपूर्ति।
- नियमित अग्नि अभ्यास।
- अनिवार्य अग्नि सुरक्षा प्रमाणीकरण और विद्युत जाँच।
- सुस्पष्ट निकासी कार्यविधि।
निकासी सिद्धांत: बचाव → चेतावनी → क्षेत्र को सीमित करना → आग बुझाना/निकासी।
तीन-भाषा सूत्र से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान भारत में अंग्रेज़ी की स्थिति और उसके ऐतिहासिक विकास पर चर्चा सामने आई। प्रश्न केवल भाषा का नहीं, बल्कि शिक्षा, शासन, सांस्कृतिक पहचान और भाषाई विविधता का भी है।
प्रमुख तथ्य
- तीन-भाषा सूत्र में तीन में से दो भाषाओं को भारतीय भाषाओं की श्रेणी में रखा गया है; अंग्रेज़ी को इस श्रेणी में शामिल नहीं किया गया है।
- उपलब्ध सामग्री के अनुसार भारत में अंग्रेज़ी का प्रयोग मैकाले के 1835 के प्रसिद्ध मिनट से काफी पहले शुरू हो चुका था।
- 17वीं शताब्दी से अंग्रेज़ी और भारतीय भाषाओं का संपर्क विकसित हुआ तथा 18वीं और 19वीं शताब्दी में यह बढ़ा।
- 2011 की जनगणना के अनुसार लगभग 10% भारतीय अंग्रेज़ी बोलते हैं।
भाषाई विविधता की चुनौती
स्रोत में यह चिंता व्यक्त की गई है कि अनेक छोटी भाषाओं को बड़ी भाषाओं की उपभाषा या उपसमूह के रूप में दर्ज करने से भारत की वास्तविक भाषाई विविधता का पूरा चित्र सामने नहीं आता।
सऊदी अरब, तुर्किये और पाकिस्तान ने मक्का संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इसके अंतर्गत किसी एक हस्ताक्षरकर्ता पर हमला तीनों पर हमला माना जाएगा।
बांग्लादेश की संभावित भूमिका
उपलब्ध सामग्री के अनुसार बांग्लादेश ने संकेत दिया है कि यदि मौजूदा सदस्य उसे इस ढाँचे में शामिल करने का प्रस्ताव देते हैं तो वह सकारात्मक रूप से विचार कर सकता है। हालांकि तत्काल सदस्यता पर कोई औपचारिक चर्चा नहीं चल रही थी।
रणनीतिक दृष्टि
- राष्ट्रीय हित और दीर्घकालीन सुरक्षा का मूल्यांकन।
- क्षेत्रीय शक्ति-संतुलन पर प्रभाव।
- सामूहिक रक्षा व्यवस्था के लाभ और जोखिम।
- दक्षिण एशिया तथा पश्चिम एशिया की बदलती रणनीतिक संरचना।
जुलाई 2026 में भारत की औद्योगिक वृद्धि 6.7% रही, जबकि जून में यह 8.8% थी। उपलब्ध सामग्री के अनुसार जुलाई की वृद्धि पिछले वर्ष दिसंबर के बाद दूसरी सबसे तेज वृद्धि थी।
औद्योगिक उत्पादन सूचकांक क्या है?
यह अर्थव्यवस्था में एक निश्चित अवधि के दौरान औद्योगिक उत्पादन की मात्रा में होने वाले अल्पकालिक परिवर्तनों को मापने वाला प्रमुख व्यापक आर्थिक संकेतक है। इसे राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय, सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के अंतर्गत जारी करता है।
प्रमुख क्षेत्र
- खनन एवं उत्खनन
- विनिर्माण
- विद्युत
- नई शृंखला में गैस, जल आपूर्ति, मलजल तथा अपशिष्ट प्रबंधन को भी शामिल किया गया है।
आधार वर्ष में परिवर्तन
औद्योगिक उत्पादन सूचकांक का आधार वर्ष 2011–12 से 2022–23 किया गया है। विद्युत उत्पादन को नवीकरणीय और अनवीकरणीय स्रोतों में अलग-अलग देखने की सुविधा भी दी गई है।
भारत ने अमेरिका के साथ जेवलिन टैंक-रोधी निर्देशित मिसाइल प्रणालियों की खरीद के लिए प्रस्ताव एवं स्वीकृति-पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं। यह भारत-अमेरिका रक्षा सहयोग की गहराई को दर्शाता है।
जेवलिन की प्रमुख विशेषताएँ
- मध्यम दूरी की टैंक-रोधी निर्देशित मिसाइल।
- बख्तरबंद वाहनों और मजबूत रक्षा-स्थानों को लक्ष्य बनाने के लिए विकसित।
- दागो और भूल जाओ क्षमता—प्रक्षेपण के बाद संचालक को पूरे मार्ग में मिसाइल का मार्गदर्शन नहीं करना पड़ता।
निर्माण
जेवलिन प्रणाली का निर्माण जेवलिन संयुक्त उद्यम द्वारा किया जाता है, जिसमें आरटीएक्स और लॉकहीड मार्टिन शामिल हैं।
भारत के लिए महत्व
- टैंक-रोधी क्षमता को मजबूत करना।
- महत्वपूर्ण सैन्य परिचालन क्षमता में वृद्धि।
- भारत-अमेरिका रक्षा-औद्योगिक सहयोग को बढ़ाना।
- भविष्य में सह-उत्पादन की संभावनाएँ।
थैलेसीमिया एक आनुवंशिक रक्त विकार है जिसमें शरीर पर्याप्त सामान्य हीमोग्लोबिन नहीं बना पाता। इसके कारण स्वस्थ लाल रक्त कोशिकाओं की कमी और रक्ताल्पता हो सकती है।
प्रमुख लक्षण
- वृद्धि में विलंब और किशोरावस्था में विलंब।
- हड्डियों में असामान्यताएँ।
- भूख में कमी, पीलिया और गहरे रंग का मूत्र।
- गंभीर मामलों में चेहरे की हड्डियों में विकृति।
भारत में स्थिति
उपलब्ध सामग्री के अनुसार भारत में लगभग 1–1.5 लाख बच्चे इस रोग के साथ रह रहे हैं तथा लगभग 4.2 करोड़ भारतीय बीटा-थैलेसीमिया के वाहक हैं।
उपचार
- नियमित रक्त आधान।
- शरीर में अतिरिक्त लौह के जमाव को रोकने के लिए लौह-बंधन उपचार।
- गंभीर मामलों में अस्थि-मज्जा या स्टेम कोशिका प्रत्यारोपण संभावित उपचार हो सकता है।
2021 में तालिबान के सत्ता में लौटने के बाद अफगानिस्तान में अपेक्षाकृत स्थिरता दिखाई दी है, लेकिन सामाजिक, आर्थिक और मानवीय चुनौतियाँ गंभीर बनी हुई हैं।
सकारात्मक पक्ष
- देश में अपेक्षाकृत स्थिरता और सुरक्षा।
- पाकिस्तान और ईरान से लाखों शरणार्थियों की वापसी।
मुख्य चिंताएँ
- लड़कियों की शिक्षा पर कठोर प्रतिबंध।
- लैंगिक पृथक्करण।
- महिलाओं की राजनीतिक एवं सामाजिक भागीदारी का सीमित होना।
- जातीय अल्पसंख्यकों की सीमित भागीदारी।
- गरीबी, खाद्य संकट और सीमित बाहरी सहायता।
उपलब्ध सामग्री के अनुसार लगभग आधी आबादी राष्ट्रीय गरीबी रेखा के नीचे है और मानव विकास सूचकांक 0.496 बताया गया है।
नेपाल, भारत और चीन में आई विनाशकारी बाढ़ ने यह स्पष्ट किया कि प्राकृतिक आपदाएँ राजनीतिक सीमाओं का पालन नहीं करतीं। इनके प्रभावों से निपटने के लिए क्षेत्रीय सहयोग आवश्यक है।
भारत पर प्रभाव
उपलब्ध सामग्री के अनुसार बाढ़ का पानी गंडक, कोसी और गंगा नदियों तक पहुँचा। बिहार में पटना सहित संवेदनशील क्षेत्रों में सतर्कता बढ़ाई गई तथा वाल्मीकिनगर बैराज और कमजोर तटबंधों की निगरानी की गई।
साझा आपदा प्रबंधन की आवश्यकता
- वास्तविक समय में आँकड़ों का आदान-प्रदान।
- सीमा-पार पूर्व चेतावनी प्रणालियाँ।
- नदी बेसिन स्तर पर सहयोग।
- हिमनद झीलों की संयुक्त निगरानी।
- उपग्रह आधारित आपदा निगरानी।
- संयुक्त बचाव एवं राहत व्यवस्था।
भारत निर्वाचन आयोग द्वारा मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया के दौरान कुछ राज्यों में बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने को लेकर प्रश्न उठे हैं। यह विषय मतदाता अधिकार, पारदर्शिता और लोकतांत्रिक भागीदारी से जुड़ा है।
उपलब्ध सामग्री के प्रमुख तथ्य
- तेलंगाना में लगभग 22% और कर्नाटक में लगभग 19.5% नाम हटाए जाने का उल्लेख है।
- बेंगलुरु के कुछ निर्वाचन क्षेत्रों में आधे से अधिक मतदाताओं के नाम हटने तथा हैदराबाद के कुछ क्षेत्रों में 40% से अधिक कटौती का उल्लेख किया गया है।
- निर्वाचन आयोग के आँकड़ों की पारदर्शिता तथा मतदाता-जनसंख्या अनुपात प्रकाशित किए जाने की आवश्यकता पर प्रश्न उठाए गए हैं।
- कर्नाटक में हटाए गए नामों का लिंग-वार विवरण उपलब्ध न होने की चिंता भी व्यक्त की गई है।
लोकतांत्रिक दृष्टि से महत्व
- मतदाता सूची की शुद्धता और समावेशिता दोनों आवश्यक हैं।
- गलत तरीके से हटाए गए नामों के लिए सरल शिकायत-निवारण व्यवस्था होनी चाहिए।
- पुनरीक्षण प्रक्रिया में पारदर्शिता और सत्यापन की सुविधा बढ़नी चाहिए।



