8 सितंबर 2026 की समसामयिकी | संघ लोक सेवा आयोग एवं प्रांतीय सिविल सेवा हेतु महत्वपूर्ण करेंट अफेयर्स नोट्स

8 सितंबर 2026 की समसामयिकी | संघ लोक सेवा आयोग एवं प्रांतीय सिविल सेवा
अरिविद्या

8 सितंबर 2026 — मंगलवार

समसामयिकी

संघ लोक सेवा आयोग एवं प्रांतीय सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा + मुख्य परीक्षा दैनिक समसामयिकी
आज के प्रमुख विषय: ब्रिक्स, विकास के साधन के रूप में अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी, अमेरिकी शुल्क एवं भारतीय अनुसंधान, किशोर एवं सामाजिक माध्यम, रक्षा खरीद तथा उपभोक्ता संरक्षण।

1. ब्रिक्स का मूल उद्देश्य और भारत की भूमिका

सामान्य अध्ययन–II — अंतरराष्ट्रीय संबंध

संदर्भ

18वाँ ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 12–13 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में प्रस्तावित है। उपलब्ध अध्ययन सामग्री के अनुसार भारत के पास विस्तारित ब्रिक्स समूह को अधिक सुसंगत दिशा देने का अवसर है।

ब्रिक्स का मूल उद्देश्य

  • उभरती अर्थव्यवस्थाओं को वैश्विक शासन में अधिक प्रभावी आवाज देना।
  • अंतरराष्ट्रीय वित्तीय एवं आर्थिक संस्थाओं में सुधार का समर्थन करना।
  • अधिक न्यायसंगत बहुपक्षीय व्यवस्था को बढ़ावा देना।
  • वैश्विक दक्षिण की भूमिका को मजबूत करना।

भारत की भूमिका

2012 में भारत की अध्यक्षता में हुए चौथे ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का विषय “वैश्विक स्थिरता, सुरक्षा और समृद्धि” था। भारत की अध्यक्षता के दौरान नवीन विकास बैंक की स्थापना की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई तथा आतंकवाद-रोधी सहयोग को भी ब्रिक्स के कार्यक्षेत्र में शामिल किया गया।

वर्तमान चुनौतियाँ

  • सदस्य देशों के बीच रणनीतिक मतभेद।
  • चीन और पश्चिमी देशों के बीच बढ़ता प्रतिस्पर्धात्मक तनाव।
  • ब्रिक्स के विस्तार से बढ़ती आंतरिक विविधता।
  • ब्रिक्स को पश्चिम-विरोधी मंच बनने से बचाते हुए सुधारवादी मंच बनाए रखना।
  • सर्वसम्मति आधारित निर्णय-प्रक्रिया को बनाए रखना।

उपलब्ध सामग्री के अनुसार मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और इंडोनेशिया के जुड़ने के बाद ब्रिक्स में 11 सदस्य हैं।

भारत के लिए आगे की राह

भारत को ब्रिक्स को अपनी बहु-संरेखण आधारित व्यापक विदेश नीति के अनुरूप रखते हुए सुधारवादी और बहुपक्षीय एजेंडे को सक्रिय रूप से आगे बढ़ाना चाहिए।

प्रारंभिक परीक्षा

प्रश्न: ब्रिक्स के मूल उद्देश्यों में निम्नलिखित में से कौन-सा शामिल है?

  1. केवल सैन्य गठबंधन बनाना
  2. वैश्विक शासन में उभरती अर्थव्यवस्थाओं की आवाज मजबूत करना
  3. केवल द्विपक्षीय व्यापार बढ़ाना
  4. संयुक्त राष्ट्र का विकल्प बनना

उत्तर: (ख)

मुख्य परीक्षा

प्रश्न: “ब्रिक्स का विस्तार अधिक प्रतिनिधित्वपूर्ण एवं बहुध्रुवीय वैश्विक व्यवस्था की बढ़ती मांग को दर्शाता है, किंतु आंतरिक मतभेद इसकी प्रभावशीलता को सीमित करते हैं।” चर्चा कीजिए।

(250 शब्द | 15 अंक)

समसामयिकी की शुरुआत

2. विकास के साधन के रूप में अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी

सामान्य अध्ययन–III — विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी

संदर्भ

अध्ययन सामग्री में इस बात पर जोर दिया गया है कि भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन को अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी को विकास के साधन के रूप में केंद्रित रखना चाहिए।

भारतीय अंतरिक्ष नीति, 2023

अप्रैल 2023 की भारतीय अंतरिक्ष नीति के बाद भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने तथा भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन को अधिक महत्वाकांक्षी अनुसंधान एवं अन्वेषण अभियानों पर केंद्रित करने की दिशा स्पष्ट हुई है।

मुख्य मुद्दे

  • कर्मचारियों की संख्या और भर्ती।
  • मुख्य कार्यों की बाहरी संस्थाओं को सौंपने की प्रवृत्ति।
  • निजी क्षेत्र की बढ़ती भूमिका।
  • रोजगार सुरक्षा।

भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन एवं प्राधिकरण केंद्र

यह निजी एवं गैर-सरकारी संस्थाओं की अंतरिक्ष गतिविधियों को प्रोत्साहित और अधिकृत करने के लिए एकल-खिड़की व्यवस्था के रूप में कार्य करता है।

  • अंतरिक्ष प्रक्षेपण की अनुमति
  • प्रक्षेपण केंद्रों की स्थापना
  • उपग्रहों से संबंधित वाणिज्यिक गतिविधियाँ
  • उच्च-रिजॉल्यूशन आँकड़ों का प्रसार
  • निजी संस्थाओं के साथ प्रौद्योगिकी एवं सर्वोत्तम प्रक्रियाओं को साझा करना

न्यू स्पेस इंडिया लिमिटेड

इसका प्रमुख कार्य सार्वजनिक व्यय से विकसित अंतरिक्ष प्रौद्योगिकियों एवं मंचों का व्यावसायीकरण करना है।

प्रारंभिक परीक्षा

प्रश्न: भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन एवं प्राधिकरण केंद्र का प्रमुख उद्देश्य क्या है?

  1. केवल सैन्य उपग्रहों का निर्माण
  2. अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी भागीदारी को सुगम बनाना और अधिकृत करना
  3. केवल अंतरिक्ष यात्रियों का प्रशिक्षण
  4. केवल विदेशी उपग्रहों को नियंत्रित करना

उत्तर: (ख)

मुख्य परीक्षा

प्रश्न: “भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी क्षेत्र की बढ़ती भागीदारी अवसरों के साथ संस्थागत एवं रोजगार संबंधी चुनौतियाँ भी उत्पन्न करती है।” चर्चा कीजिए।

समसामयिकी की शुरुआत

3. अमेरिकी शुल्क और भारतीय अनुसंधान एवं नवाचार

सामान्य अध्ययन–II एवं III — अर्थव्यवस्था तथा प्रौद्योगिकी

संदर्भ

अध्ययन सामग्री का तर्क है कि अमेरिकी शुल्क भारतीय अनुसंधान एवं नवाचार को प्रभावित करने वाला एकमात्र या मुख्य कारण नहीं हैं।

प्रभावित क्षेत्र

  • कार्बनिक रसायन
  • प्लास्टिक
  • आधार धातुएँ
  • मशीनरी
  • वाहन कल-पुर्जे
  • चमड़ा

अनुसंधान एवं विकास की समस्या

उपलब्ध सामग्री के अनुसार इन क्षेत्रों में अनुसंधान एवं विकास पर व्यय पहले से ही अपेक्षाकृत कम रहा है। इसलिए चुनौती केवल शुल्क नहीं, बल्कि भारतीय उद्योगों की कम अनुसंधान-तीव्रता भी है।

प्रमुख नीति आवश्यकता

  • उद्योगों द्वारा अनुसंधान एवं विकास पर किए जा रहे व्यय का बेहतर आकलन।
  • अनुसंधान व्यय और निर्यात प्रदर्शन के संबंध का अध्ययन।
  • भविष्य के व्यापारिक झटकों के प्रति संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान।
  • तेज और अधिक विस्तृत संस्थान-स्तरीय अनुसंधान आँकड़ों की उपलब्धता।

आगे की राह

भारत को निजी अनुसंधान निवेश बढ़ाने, उद्योग-अकादमिक सहयोग मजबूत करने, अनुसंधान आँकड़ों की उपलब्धता सुधारने और उच्च-मूल्य विनिर्माण को बढ़ावा देने की आवश्यकता है।

प्रारंभिक परीक्षा

प्रश्न: भारतीय उद्योगों में नवाचार क्षमता बढ़ाने के लिए सबसे उपयुक्त दीर्घकालिक उपाय कौन-सा है?

  1. केवल आयात शुल्क बढ़ाना
  2. अनुसंधान एवं विकास में निवेश बढ़ाना
  3. विदेशी व्यापार समाप्त करना
  4. निजी अनुसंधान को प्रतिबंधित करना

उत्तर: (ख)

मुख्य परीक्षा

प्रश्न: “भारत की औद्योगिक प्रतिस्पर्धा की समस्या केवल व्यापार शुल्कों से संबंधित नहीं है, बल्कि कम अनुसंधान एवं विकास निवेश से भी जुड़ी है।” विश्लेषण कीजिए।

समसामयिकी की शुरुआत

4. किशोर और सामाजिक माध्यम की लत

सामान्य अध्ययन–III — विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा सामाजिक मुद्दे

संदर्भ

अध्ययन सामग्री में सामाजिक माध्यमों के किशोरों पर प्रभाव तथा एक प्रमुख सामाजिक माध्यम कंपनी के विरुद्ध अमेरिकी राज्यों के साथ हुए 17.1 अरब डॉलर के समझौते की चर्चा की गई है।

प्रमुख चिंताएँ

  • छोटे वीडियो आधारित मंच ध्यान अवधि को प्रभावित कर सकते हैं।
  • उपयोगकर्ताओं को लंबे समय तक मंच पर बनाए रखने की प्रवृत्ति।
  • सामाजिक तुलना में वृद्धि।
  • लोकप्रियता और सामाजिक स्वीकृति को सार्वजनिक पसंद तथा अनुयायियों की संख्या से जोड़ना।

किशोरावस्था और डिजिटल व्यवहार

विकासात्मक मनोविज्ञान के अनुसार किशोरावस्था में जोखिम लेने की प्रवृत्ति तीव्र हो सकती है, जबकि आत्म-नियंत्रण से जुड़े तंत्र अभी विकसित हो रहे होते हैं। इसलिए डिजिटल मंचों का डिजाइन किशोरों के व्यवहार पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकता है।

सहकर्मी प्रभाव

किशोरों के विभिन्न सामाजिक माध्यमों पर जाने में साथियों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। जब लोकप्रियता को पसंद और अनुयायियों की संख्या से मापा जाता है, तब सामाजिक समावेशन और बहिष्करण का दबाव बढ़ सकता है।

नीति प्रश्न

किशोरों पर सामाजिक माध्यम के प्रभाव को समझने के लिए केवल मंच के तकनीकी डिजाइन को नहीं, बल्कि किशोरावस्था की विकासात्मक मनोवैज्ञानिक आवश्यकताओं और उनके बीच होने वाली परस्पर क्रिया को भी समझना आवश्यक है।

प्रारंभिक परीक्षा

प्रश्न: किशोरों के सामाजिक माध्यम उपयोग के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कारक महत्वपूर्ण हो सकता है?

  1. सहकर्मी प्रभाव
  2. सामाजिक स्वीकृति के प्रति संवेदनशीलता
  3. मंच का डिजाइन
  4. उपर्युक्त सभी

उत्तर: (घ)

मुख्य परीक्षा

प्रश्न: “किशोरों पर सामाजिक माध्यम के प्रभाव को समझने के लिए केवल तकनीकी डिजाइन नहीं, बल्कि किशोरावस्था की विकासात्मक मनोविज्ञान को भी समझना आवश्यक है।” चर्चा कीजिए।

समसामयिकी की शुरुआत

5. रक्षा खरीद में स्वदेशीकरण

सामान्य अध्ययन–II — शासन एवं सुरक्षा

संदर्भ

रक्षा अधिग्रहण परिषद ने सशस्त्र बलों के लिए लगभग 1.10 लाख करोड़ रुपये की खरीद संबंधी प्रस्तावों को मंजूरी दी। उपलब्ध सामग्री के अनुसार लगभग 98 प्रतिशत खरीद भारतीय उद्योग से किए जाने की योजना है।

थल सेना के लिए

  • जैविक, रासायनिक एवं परमाणु खतरे की पहचान करने वाले वाहन
  • उच्च गतिशीलता वाले वाहन
  • स्वचालित यांत्रिक सुरंग बिछाने वाले वाहन
  • उन्नत हल्के हेलीकॉप्टर
  • सुरंगरोधी टैंक
  • सर्वत्र पुल प्रणाली

सर्वत्र पुल प्रणाली

यह ट्रक आधारित बहु-खंड चलायमान यांत्रिक पुल है। इसे रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन के अभियंता अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान ने विकसित किया है तथा भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड ने उद्योग सहयोगियों के साथ इसका निर्माण किया है। यह पाँच 15-मीटर के कैंची-प्रकार पुल खंडों के माध्यम से कुल 75 मीटर तक की दूरी पार करने में सक्षम है।

नौसेना और वायु सेना

नौसेना के लिए अरुधरा रडार और समुद्री गैस टर्बाइन से संबंधित प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। समुद्री गैस टर्बाइन के स्वदेशी विकास से युद्धपोतों की प्रणोदन प्रणाली में विदेशी निर्भरता कम करने में सहायता मिल सकती है। वायु सेना की क्षमता बढ़ाने के लिए बहुउद्देश्यीय भूमि-आधारित जैमर और सुरक्षित अभिगम कार्ड प्रणाली से संबंधित प्रस्तावों को भी मंजूरी दी गई।

रक्षा अधिग्रहण परिषद

रक्षा अधिग्रहण परिषद भारत में पूंजीगत रक्षा खरीद से संबंधित सर्वोच्च निर्णयकारी निकाय है। इसके अध्यक्ष रक्षा मंत्री होते हैं।

प्रारंभिक परीक्षा

प्रश्न: रक्षा अधिग्रहण परिषद के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा सही है?

  1. यह भारत का सर्वोच्च न्यायिक निकाय है।
  2. यह पूंजीगत रक्षा खरीद के लिए सर्वोच्च निर्णयकारी निकाय है।
  3. यह केवल सैन्य प्रशिक्षण से संबंधित है।
  4. यह विदेश मंत्रालय के अधीन कार्य करता है।

उत्तर: (ख)

मुख्य परीक्षा

प्रश्न: भारत की रक्षा खरीद में स्वदेशीकरण और निजी उद्योग की बढ़ती भूमिका राष्ट्रीय सुरक्षा एवं आत्मनिर्भरता को किस प्रकार प्रभावित कर सकती है? चर्चा कीजिए।

समसामयिकी की शुरुआत

6. भ्रामक “100 प्रतिशत” दावों पर उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण की कार्रवाई

प्रारंभिक परीक्षा + सामान्य अध्ययन–II

संदर्भ

केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण ने खाद्य कंपनियों द्वारा किए जा रहे भ्रामक “100 प्रतिशत” विपणन दावों के विरुद्ध नियामकीय कार्रवाई तेज की है।

केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण

केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण की स्थापना उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत जुलाई 2020 में की गई थी। इसका उद्देश्य सामूहिक उपभोक्ता अधिकारों की सुरक्षा, संवर्धन और प्रवर्तन सुनिश्चित करना है।

प्रमुख कार्य

  • उपभोक्ता अधिकारों के उल्लंघन से संबंधित मामलों में कार्रवाई।
  • अनुचित व्यापार व्यवहार पर नियंत्रण।
  • झूठे या भ्रामक विज्ञापनों के विरुद्ध कार्रवाई।
  • खतरनाक या असुरक्षित उत्पादों को वापस मंगाने का निर्देश।
  • उपभोक्ताओं को धनवापसी का आदेश।
  • डिजिटल व्यापार में उपभोक्ता-विरोधी प्रथाओं पर दिशा-निर्देश जारी करना।

विशेष महत्व

डार्क पैटर्न, छद्म विज्ञापन और छिपे हुए सेवा शुल्क जैसी प्रथाएँ डिजिटल बाजार में उपभोक्ताओं के निर्णय को प्रभावित कर सकती हैं। इसलिए आधुनिक उपभोक्ता संरक्षण व्यवस्था में पारदर्शिता और सही सूचना का विशेष महत्व है।

प्रारंभिक परीक्षा

प्रश्न: केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण किस अधिनियम के तहत स्थापित किया गया है?

  1. उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 1986
  2. उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019
  3. प्रतिस्पर्धा अधिनियम, 2002
  4. विधिक मापविज्ञान अधिनियम, 2009

उत्तर: (ख)

मुख्य परीक्षा

प्रश्न: डिजिटल एवं आधुनिक बाजार व्यवस्था में उपभोक्ता संरक्षण के लिए केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण की भूमिका का मूल्यांकन कीजिए। भ्रामक विज्ञापनों और डार्क पैटर्न जैसी प्रथाओं से निपटने में इसकी शक्तियाँ कितनी प्रभावी हैं?

समसामयिकी की शुरुआत
© अरिविद्या · ज्ञान से प्रशासन तक

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