📌 चर्चा में क्यों?
भारत और ब्रिटेन के बीच व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता (Comprehensive Economic and Trade Agreement – CETA) संपन्न हुआ है। इसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश तथा आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देना है।
प्रमुख बिंदु
- भारत और ब्रिटेन के बीच व्यापारिक संबंधों को नई दिशा मिलेगी।
- अनेक वस्तुओं पर सीमा शुल्क (Custom Duty) में कमी अथवा समाप्ति का प्रावधान।
- भारतीय वस्त्र, चमड़ा, रत्न एवं आभूषण, इंजीनियरिंग उत्पाद तथा कृषि-आधारित निर्यात को बढ़ावा मिलने की संभावना।
- सेवा क्षेत्र, विशेषकर सूचना प्रौद्योगिकी एवं पेशेवर सेवाओं को लाभ।
- निवेश और रोजगार के नए अवसर सृजित होने की संभावना।
परीक्षा की दृष्टि से
CETA क्या है?
व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता (CETA) ऐसा मुक्त व्यापार समझौता है जिसके माध्यम से दो देश वस्तुओं, सेवाओं, निवेश तथा अन्य आर्थिक क्षेत्रों में व्यापारिक बाधाओं को कम करते हैं।
भारत को संभावित लाभ
- निर्यात में वृद्धि
- विदेशी निवेश को प्रोत्साहन
- रोजगार के अवसरों में विस्तार
- भारतीय MSME क्षेत्र को नए बाज़ार
- वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भारत की भागीदारी मजबूत होना
संभावित चुनौतियाँ
- घरेलू उद्योगों पर प्रतिस्पर्धात्मक दबाव
- कुछ क्षेत्रों में आयात बढ़ने की संभावना
- गुणवत्ता मानकों का पालन
- व्यापार घाटे की चुनौती
UPSC के लिए महत्त्व
- GS Paper-3 (भारतीय अर्थव्यवस्था)
- मुक्त व्यापार समझौते (FTA)
- अंतरराष्ट्रीय व्यापार
- निर्यात नीति
- विदेशी निवेश
PYQ
प्रश्न (UPSC):
भारत के आर्थिक विकास में मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) की भूमिका का परीक्षण कीजिए।
अभ्यास प्रश्न (MCQ)
प्रश्न: भारत–ब्रिटेन CETA का मुख्य उद्देश्य क्या है?
(A) रक्षा सहयोग बढ़ाना
(B) व्यापार एवं निवेश को बढ़ावा देना
(C) सीमा विवाद का समाधान
(D) संयुक्त मुद्रा लागू करना
उत्तर: (B)
मुख्य परीक्षा प्रश्न (15 अंक)
“भारत–ब्रिटेन व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता (CETA) भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए अवसरों के साथ-साथ नई चुनौतियाँ भी प्रस्तुत करता है।” चर्चा कीजिए।
निष्कर्ष
भारत–ब्रिटेन CETA दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यदि इसका प्रभावी क्रियान्वयन किया जाए, तो यह भारत के निर्यात, निवेश, रोजगार तथा वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को नई गति प्रदान कर सकता है।


