(सामान्य अध्ययन – तृतीय प्रश्नपत्र | आंतरिक सुरक्षा | साइबर सुरक्षा | समसामयिक घटनाएँ)
प्रस्तावना
डिजिटल भारत के निर्माण के साथ देश में ऑनलाइन बैंकिंग, डिजिटल भुगतान और ई-गवर्नेंस का तेजी से विस्तार हुआ है। इसके साथ ही साइबर अपराधों का स्वरूप भी अधिक जटिल और संगठित होता जा रहा है। हाल के वर्षों में डिजिटल अरेस्ट स्कैम एक नए प्रकार के साइबर अपराध के रूप में सामने आया है, जिसमें अपराधी स्वयं को पुलिस, सीबीआई, ईडी या अन्य सरकारी एजेंसियों का अधिकारी बताकर लोगों से करोड़ों रुपये की ठगी कर रहे हैं।
हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय ने भी इस बढ़ते साइबर अपराध पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए प्रभावी रोकथाम के निर्देश दिए हैं। यह विषय यूपीएससी प्रारंभिक एवं मुख्य परीक्षा दोनों की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
डिजिटल अरेस्ट स्कैम क्या है?
डिजिटल अरेस्ट स्कैम एक ऐसा साइबर अपराध है जिसमें अपराधी वीडियो कॉल या फोन कॉल के माध्यम से स्वयं को—
• पुलिस अधिकारी
• केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI)
• प्रवर्तन निदेशालय (ED)
• भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI)
• आयकर विभाग
का अधिकारी बताकर लोगों को डराते हैं।
पीड़ित को बताया जाता है कि उसका नाम किसी आपराधिक मामले, मनी लॉन्ड्रिंग, ड्रग्स तस्करी या अन्य गंभीर अपराध में आया है तथा उसे “डिजिटल अरेस्ट” कर लिया गया है। इसके बाद जाँच या सत्यापन के नाम पर बड़ी धनराशि ऑनलाइन ट्रांसफर करवा ली जाती है।
महत्वपूर्ण तथ्य: भारतीय कानून में “डिजिटल अरेस्ट” नाम की कोई कानूनी व्यवस्था नहीं है। यह केवल ठगी का एक तरीका है।
यह ठगी कैसे की जाती है?
अपराधी पहले पीड़ित को कॉल करते हैं और सरकारी अधिकारी होने का दावा करते हैं।
इसके बाद—
• गिरफ्तारी की धमकी दी जाती है।
• वीडियो कॉल के माध्यम से नकली कार्यालय दिखाया जाता है।
• फर्जी पहचान पत्र और दस्तावेज़ दिखाए जाते हैं।
• पीड़ित को किसी से बात न करने की चेतावनी दी जाती है।
• बैंक खाते से तुरंत पैसे ट्रांसफर करवाए जाते हैं।
डिजिटल अरेस्ट स्कैम क्यों बढ़ रहा है?
साइबर अपराधी नई तकनीकों का उपयोग कर रहे हैं।
इनमें प्रमुख हैं—
• SIM Box के माध्यम से विदेशी कॉल को भारतीय नंबर जैसा दिखाना।
• Deepfake वीडियो द्वारा नकली अधिकारी तैयार करना।
• Mule Bank Accounts के माध्यम से पैसे का तेजी से लेन-देन।
• म्यांमार एवं कंबोडिया जैसे देशों से संचालित संगठित साइबर गिरोह।
सर्वोच्च न्यायालय की टिप्पणी
सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि डिजिटल अरेस्ट जैसे साइबर अपराध लगातार विकसित हो रहे हैं।
न्यायालय ने निम्नलिखित बिंदुओं पर बल दिया—
• पीड़ितों की धनराशि शीघ्र वापस कराई जाए।
• फ्रीज किए गए बैंक खातों का त्वरित निस्तारण हो।
• संदिग्ध बैंक खातों की पहचान मजबूत की जाए।
• बैंकों और जाँच एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाए।
म्यूल बैंक खाता क्या है?
म्यूल बैंक खाता वह बैंक खाता होता है जिसका उपयोग साइबर अपराधी अवैध धन के लेन-देन के लिए करते हैं।
अक्सर खाते का वास्तविक धारक इस बात से अनजान होता है कि उसका खाता अपराध में उपयोग किया जा रहा है।
इस कारण वास्तविक अपराधियों तक पहुँचना कठिन हो जाता है।
MuleHunter.AI क्या है?
MuleHunter.AI भारतीय रिज़र्व बैंक इनोवेशन हब (RBI Innovation Hub) द्वारा विकसित कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित प्रणाली है।
प्रमुख विशेषताएँ
• म्यूल खातों की पहचान
• वास्तविक समय में निगरानी
• बैंकों के साथ समन्वित कार्य
• संदिग्ध लेन-देन की शीघ्र पहचान
भारत के समक्ष प्रमुख चुनौतियाँ
• कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित साइबर अपराध
• सीमा-पार साइबर अपराध नेटवर्क
• डिजिटल साक्षरता की कमी
• कम दोषसिद्धि दर
• अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जाँच में कठिनाई
समाधान एवं आगे की राह
• साइबर पुलिसिंग को मजबूत बनाना।
•कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित निगरानी प्रणाली का विस्तार।
• नागरिकों में साइबर जागरूकता बढ़ाना।
• अंतरराष्ट्रीय सहयोग को सुदृढ़ करना।
• बैंकों में उन्नत सुरक्षा प्रणाली विकसित करना।
• डिजिटल साक्षरता को बढ़ावा देना।
यूपीएससी प्रारंभिक परीक्षा (मॉडल प्रश्न)
प्रश्न: डिजिटल अरेस्ट स्कैम के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए—
1. डिजिटल अरेस्ट भारतीय दंड प्रक्रिया में मान्यता प्राप्त कानूनी प्रक्रिया है।
2. म्यूल बैंक खातों का उपयोग साइबर अपराधी अवैध धन के लेन-देन के लिए करते हैं।
3. MuleHunter.AI का विकास RBI Innovation Hub द्वारा किया गया है।
उपरोक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
(क) केवल 1
(ख) केवल 2
(ग) केवल 2 और 3 ✔️
(घ) 1, 2 और 3
उत्तर: (ग)
यूपीएससी मुख्य परीक्षा (वास्तविक प्रश्न)
संघ लोक सेवा आयोग, मुख्य परीक्षा 2023 (सामान्य अध्ययन–III)
“भारत के समक्ष साइबर सुरक्षा से उत्पन्न चुनौतियों का परीक्षण कीजिए। देश की साइबर सुरक्षा एवं साइबर सदृढ़ता को मजबूत बनाने के उपाय सुझाइए।”
(15 अंक)
अभ्यास हेतु मुख्य परीक्षा प्रश्न
“डिजिटल अरेस्ट स्कैम जैसे साइबर अपराध भारत की आंतरिक सुरक्षा एवं डिजिटल अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बनकर उभरे हैं।” इस कथन के आलोक में डिजिटल अरेस्ट स्कैम की कार्यप्रणाली, उससे उत्पन्न चुनौतियों तथा प्रभावी समाधान का विश्लेषण कीजिए।
(250 शब्द | 15 अंक)
निष्कर्ष
डिजिटल अरेस्ट स्कैम यह दर्शाता है कि तकनीकी प्रगति के साथ साइबर अपराध भी अधिक संगठित और उन्नत होते जा रहे हैं। कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डीपफेक तकनीक तथा अंतरराष्ट्रीय साइबर गिरोहों के कारण यह चुनौती और गंभीर हो गई है। ऐसे में मजबूत साइबर शासन, उन्नत तकनीकी निगरानी, जन-जागरूकता तथा अंतरराष्ट्रीय सहयोग ही इस खतरे से प्रभावी ढंग से निपटने का सबसे उपयुक्त उपाय है।



